اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : Naate Mustafa Sun Kar Rooh Jab Machalti Hai
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी
नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी
जोड़ा गया : 11 Sep, 2023 04:39 PM IST
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Naat E Mustafa Sun Kar Rooh Jab Machalti Hai
Aashiqon Ke Chehre Se Chandni Nikalti Hai
Un Ke Sadqe Khate Hain, Un Ke Sadqe Peete Hain
Mustafa Ki Chaukhat Se Kayenat Palti Hai
Ttham Kar Shah E Deen Ki Rahmaton Ki Ungli Ko
Jannat E Mohabbat Mein Zindagi Tahalti Hai
Kaash ! Wo Nazar Aate Khwab Ke Dareche Se
Meri Deed E Hasrat Pahron Aankh Malti Hai
Lafz E Kun Ke Jalwe Mein Mustafa Ka Jalwa Hai
Noor E Mustafai Mein Kayenat Dhalti Hai
Naat E Mustafa Sun Kar Rooh Jab Machalti Hai
Aashiqon Ke Chehre Se Chandni Nikalti Hai
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यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ की अज़मत और उनके नूरानी फ़ैज़ का बयान है, जो एक आशिक़ के दिल पर होने वाले असर को बड़ी खूबसूरती से पेश करती है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब हुज़ूर ﷺ की प्रशंसा की जाती है, तो प्रेमियों की आत्मा झूम उठती है और उनके चेहरों पर रूहानी नूर चमकने लगता है। शायर कहता है कि पूरी सृष्टि का भरण-पोषण उन्हीं के दर से हो रहा है और उनकी रहमत का सहारा पाकर ही जीवन सफल होता है।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| मचलती है | मग्न या बेचैन होना (Restless with joy) |
| सदक़े | माध्यम या बदौलत (By the grace of) |
| शह-ए-दीं | धर्म के बादशाह (King of Religion) |
| दरीचे | खिड़की (Window) |
| दीद-ए-हसरत | दीदार की प्यासी नज़र (Eyes longing for a glimpse) |
| लफ़्ज़-ए-कुन | अल्लाह का हुक्म "हो जा" (The Divine command "Be") |
इस कलाम का सार यह है कि कायनात की हर नेमत और वजूद नूर-ए-मुस्तफ़ा ﷺ के सदक़े में है। शायर की दिली ख़्वाहिश है कि उसे ख़्वाब में हुज़ूर ﷺ का दीदार नसीब हो, क्योंकि उनके नाम की बरकत से ही दुनिया और आख़िरत संवरती है।
शायर के मुताबिक, मुस्तफा ﷺ की 'चौखट' से किसका पालन-पोषण (निज़ाम) चलता है?