اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : Naate Mustafa Sun Kar Rooh Jab Machalti Hai
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी
नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी
जोड़ा गया : 11 Sep, 2023 04:36 PM IST
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नात ए मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है
आशिक़ों के चेहरे से चाँदनी निकलती है
उन के सदक़े खाते हैं, उन के सदक़े पीते हैं
मुस्तफ़ा की चौखट से कायनात पलती है
थाम कर शह ए दीं की रहमतों की ऊँगली को
जन्नत ए मोहब्बत में ज़िंदगी टहलती है
काश ! वो नज़र आते ख़्वाब के दरीचे से
मेरी दीद ए हसरत पहरों आँख मलती है
लफ़्ज़ ए कुन के जल्वे में मुस्तफ़ा का जल्वा है
नूर ए मुस्तफ़ाई में कायनात ढलती है