search
लॉग इन
Get latest updates On WhatsApp

नात ए मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है Lyrics In हिन्दी

(नात ए मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है, आशिक़ों के चेहरे से चाँदनी निकलती है)


Written By

avatar
Shan E Nabi Team Desk
  • Editors Desk
  • Addednot available
  • visibilityबार देखा गया
  • comment टिप्पणियाँ
  • thumb_up0 likes
  • shareशेयर
...

टाइटल : नात ए मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी

नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी

जोड़ा गया : 11 Sep, 2023 04:39 PM IST

बार देखा गया : 701

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

नात ए मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है,
आशिक़ों के चेहरे से चाँदनी निकलती है

उन के सदक़े खाते हैं, उन के सदक़े पीते हैं,
मुस्तफ़ा की चौखट से कायनात पलती है

थाम कर शह ए दीं की रहमतों की ऊँगली को,
जन्नत ए मोहब्बत में ज़िंदगी टहलती है

काश! वो नज़र आते ख़्वाब के दरीचे से,
मेरी दीद ए हसरत पहरों आँख मलती है

लफ़्ज़ ए कुन के जल्वे में मुस्तफ़ा का जल्वा है,
नूर ए मुस्तफ़ाई में कायनात ढलती है

नात ए मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है,
आशिक़ों के चेहरे से चाँदनी निकलती है

wand_stars
Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

keyboard_arrow_down

यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ की अज़मत और उनके नूरानी फ़ैज़ का बयान है, जो एक आशिक़ के दिल पर होने वाले असर को बड़ी खूबसूरती से पेश करती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब हुज़ूर ﷺ की प्रशंसा की जाती है, तो प्रेमियों की आत्मा झूम उठती है और उनके चेहरों पर रूहानी नूर चमकने लगता है। शायर कहता है कि पूरी सृष्टि का भरण-पोषण उन्हीं के दर से हो रहा है और उनकी रहमत का सहारा पाकर ही जीवन सफल होता है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
मचलती हैमग्न या बेचैन होना (Restless with joy)
सदक़ेमाध्यम या बदौलत (By the grace of)
शह-ए-दींधर्म के बादशाह (King of Religion)
दरीचेखिड़की (Window)
दीद-ए-हसरतदीदार की प्यासी नज़र (Eyes longing for a glimpse)
लफ़्ज़-ए-कुनअल्लाह का हुक्म "हो जा" (The Divine command "Be")

सारांश (Summary)

इस कलाम का सार यह है कि कायनात की हर नेमत और वजूद नूर-ए-मुस्तफ़ा ﷺ के सदक़े में है। शायर की दिली ख़्वाहिश है कि उसे ख़्वाब में हुज़ूर ﷺ का दीदार नसीब हो, क्योंकि उनके नाम की बरकत से ही दुनिया और आख़िरत संवरती है।

शायर के मुताबिक, मुस्तफा ﷺ की 'चौखट' से किसका पालन-पोषण (निज़ाम) चलता है?

Read more ↓
Was this page helpful?
शेयर:

प्रसिद्ध कलाकार/गीतकार

सभी देखें