मेरे सरकार आए
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टाइटल : मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
श्रेणी (कटेगरी) : कव्वाली के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अमजद साबरी साबरी ब्रदर्स
नातख्वान/कलाकार: अमजद साबरी साबरी ब्रदर्स
जोड़ा गया : 19 May, 2023 08:07 AM IST
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मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
ख़्वाजा पिया हैं जग उजियारे
आल-ए-नबी, ज़हरा के दुलारे
जान-ए-अली हैं ख़्वाजा, इब्न-ए-सख़ी हैं
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
आज मोरे घर धूम मची है
ख़्वाजा पिया की शादी रची है
दूल्हा बने हैं ख़्वाजा-उस्माँ के प्यारे
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
ख़्वाजा क़ुतुब हैं आज यहाँ पर
झूम रहे हैं सारे क़लंदर
बाबा फ़रीद भी आए हुए हैं
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
मन में ख़ुशी के फूल खिले हैं
आज मोहे मोरे ख़्वाजा मिले हैं
ख़ुशियाँ मनाओ, सखियो ! झूम के गाओ
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
सोने का दियारा मैं चौमुख बारूँ
अपने ख़्वाजा के मैं तन मन वारूँ
आयो री आयो, मोरे भाग जगायो
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
मोरे अंगना मोईनुद्दीन आयो री
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यह एक अत्यंत लोकप्रिय और पारंपरिक सूफ़ियाना कलाम (कव्वाली) है। इसमें सुल्तान-उल-हिंद हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (ख़्वाजा ग़रीब नवाज़) के प्रति एक भक्त की गहरी आस्था और उनके रूहानी उर्स (मिलाप/शादी) के उत्सव की बेहद सुंदर प्रस्तुति की गई है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि भक्त अत्यंत प्रसन्न है क्योंकि उसके दिल के आँगन में रूहानी तौर पर ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती आए हैं। ख़्वाजा पिया पूरे संसार को रोशन करने वाले (जग उजियारे) हैं, जो पैग़ंबर साहब के वंशज (आल-ए-नबी) और हज़रत अली व फ़ातिमा (ज़हरा) के दुलारे हैं, जिनके आगमन से आज घर-घर में आध्यात्मिक उत्सव और धूम मची है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| मोरे अंगना | मेरे आँगन में |
| जग उजियारे | संसार को रोशन करने वाले |
| आल-ए-नबी | पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ की संतान / वंश |
| इब्न-ए-सख़ी | महादानी के पुत्र |
| उस्माँ के प्यारे | हज़रत ख़्वाजा उस्मान हारूनी के प्रिय (ख़्वाजा जी के गुरु) |
| चौमुख बारूँ | चौमुखी (चार मुख वाला) दीपक जलाना |
| तन मन वारूँ | अपना शरीर और आत्मा निछावर करना |
इस सूफ़ियाना कलाम का मुख्य सार यह है कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के आगमन की खुशी में पूरा रूहानी जगत मग्न है, जहाँ चिश्ती सिलसिले के महान बुज़ुर्ग जैसे ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी और बाबा फ़रीद गंजशकर भी रूहानी तौर पर मौजूद हैं। भक्त इस मिलन से अपने भाग्य को जागा हुआ समझता है और सोने के चौमुखी दीपक जलाकर अपने पीर पर अपना सब कुछ न्योछावर (वारूँ) करने को तैयार है। यह कलाम अमीर ख़ुसरो की रंग-रंग शैली में रूहानी आनंद को प्रदर्शित करता है।
लिरिक्स के मुताबिक, दूल्हा बने ख़्वाजा मोइनुद्दीन किसके प्यारे मुरीद हैं (उनके पीर का नाम क्या है)?