search
लॉग इन
Get latest updates On WhatsApp

मेरा पीर बादशाह है मेरा पीर शहंशाह है Lyrics In हिन्दी


Written By

avatar
Shan E Nabi Team Desk
  • Editors Desk
  • Addednot available
  • visibilityबार देखा गया
  • comment टिप्पणियाँ
  • thumb_up0 likes
  • shareशेयर
...

टाइटल : मेरा पीर बादशाह है मेरा पीर शहंशाह है

श्रेणी (कटेगरी) : कव्वाली के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : अनवर गुजराती

नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात

जोड़ा गया : 20 Feb, 2023 10:32 AM IST

बार देखा गया : 1.7K

Time to read: 7 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

मुझे आइना जो बना दिया
जो छुपा था मुझ में दिखा दिया
ना बूझा ना कोई बूझा सका
जो चिराग तूने जगा दिया

पत्थर को हीरा कर दे मेरे पीर की निगाह
ना जाने क्या बना दे मेरे पीर की निगाह

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है
मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर
मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

मुझको मिटाने वाले तो बस सोचते रहे
ऐसा नवाज़ा पीर ने सब, देखते रहे

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

क्या ख़ौफ़ मुझको क़ब्र में मुनकर नकीर का
है सर पे मेरे दस्त-ए-करम मेरे पीर का

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

पीर के रंग में जो रंग जाए, दूसरा रंग न भाए
सच्चे पीर की निस्बत वाला धोखा कभी न खाए
हीरे मोती लाल जवाहर दौलत सुहात क्या है
पीर इशारा करे तो सब कदमों में आजाए

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है
मेरा पीर, मेरा पीer, मेरा पीर, मेरा पीर
मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

हम हैं सुन्नी अकीदे वाले, ख़्वाजा का गुण गाते हैं
ख्वाजा हमारे, अन्दा ते हैं, उनका सदका खाते हैं
किसी राजा की चलती है, ना महाराजा की चलती है
हुकूमत हिन्द में तो बस मेरे ख्वाजा की चलती है

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

ऐसा फक़ीर जाने करम कोई नहीं है
तेरी तरह ख़ुदा की कसम कोई नहीं है
मैंने खंगाल डाला समंदर-ए-हयात का
मेरे सनम जैसा सनम कोई नहीं है

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

पहचानते हैं लोग इसी दर के नाम से
दुश्मन सलाम करने लगे एतराम से
आइना बना गया हूँ मैं तस्वीर के लिए
क़र्बान है मेरी जान मेरे पीर के लिए

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है
मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर
मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

जबसे हो गया हूँ पीर का, नेमत मिली मुझे
नज़र-ओ-नियाज़, फ़िक्र की दौलत मिली मुझे
मरशिद का ताज पहन के निकला जो शान से
हर आस्ताने पे बड़ी इज़्ज़त मिली मुझे

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

नस-नस में हाजी रहमा की मस्ती उतर गई
मेरे करम-नवाज़ की नज़र कम कर गई
डोंगरी के शहंशाह का ये फ़ैज़ देखिए
रहमा का दामन थामा तो मेरी क़िस्मत सवार गई

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

पूरा हर क़ौल कर दिया तूने
मेरा क़सकौल भर दिया तूने
जिसकी कीमत लगा सके ना कोई
ऐसा अनमोल कर दिया तूने

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है
मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर
मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

हाजी अली ने अपनी करामत दिखाई है
दरिया की हर एक मौज सलामी को आई है
करते हैं बड़ी शान से पानी पे हुकूमत
हाजी अली के रोज़ से आवाज़ आई है

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

मख़दूम के करम ने करम ऐसा कर दिया
दामन हमारा मंज़िल के सदके में भर दिया
संडल उठा के मख़दूम शाह को
दरगाह के हर एक ख़ादिम ने कह दिया

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है
मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर
मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

जो आइना को भी हैरान कर देता है
किसी-किसी को ख़ुदा यह जामाल देता है
सखी के दर पे तलब की क्या ज़रूरत है
तलब से पहले वो भरोली में डाल देता है

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

रहनत भी झूम-झूम के दरवाज़ा खोल उठी
बाबा फ़हदीन की चौखट भी बोल उठी

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

राजा और रंक, क़ुतुब और कलंदर नाचे
मैं तो क़तरा हूँ तेरे दर पे, समंदर नाचे
क्या बिगाड़ेगी मेरा मौज-ऐ-बल, ऐ शाहिद
साया बनकर दूआ पीर की सर पर नाचे

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है
मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर
मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

तुझे क्या बताऊँ साकी मुझे क्या बेखुदी है
जो तेरी नज़र से चटकी वो शराब मैंने पी है
ना आलम मेरा आलम है, न खुशी मेरी खुशी है
मैं उसी में ख़ुश हूँ जिसमें मेरे पीर की खुशी है

मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है
मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर, मेरा पीर
मेरा पीर बादशाह है, मेरा पीर शहंशाह है

wand_stars
Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

keyboard_arrow_down

यह सूफ़ी संतों की महिमा और गुरु (पीर) के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाने वाली एक बेहद रूहानी और विख्यात सूफ़ी मनक़बत है। इसमें पीर की दिव्य दृष्टि, उनके आध्यात्मिक प्रभाव और उनकी कृपा से एक मुरीद (शिष्य) के जीवन में आने वाले बदलावों का सुंदर वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि "मेरे पीर की रूहानी नज़र में वह चमत्कारी शक्ति है जो एक साधारण पत्थर जैसे इंसान को भी हीरा (मूल्यवान) बना दे।" शायर कहता है कि जब तक मेरे सिर पर मेरे गुरु की कृपा का हाथ है, मुझे मृत्यु के बाद क़ब्र में भी कोई डर नहीं है। उनके एक इशारे पर दुनिया की सारी धन-दौलत और शोहरत क़दमों में आ जाती है और मुझे मिटाने की चाह रखने वाले बस सोचते ही रह जाते हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दहिंदी अर्थ (Meaning)
पीर / मुर्शदआध्यात्मिक गुरु / सूफ़ी संत
दस्त-ए-करमकृपा या दया का हाथ
मुनकर नकीरइस्लाम के अनुसार क़ब्र में सवाल-जवाब करने वाले फ़रिश्ते
निस्बतसंबंध / लगाव या रूहानी जुड़ाव
क़सकौल (कश्कोल)भिक्षा पात्र / फ़कीरों का प्याला या झोली
फ़ैज़ / आस्तानाआध्यात्मिक लाभ या कृपा / गुरु का दरबार या दरगाह
मौज़-ऐ-बला / बेख़ुदीमुसीबतों की लहर / ईश्वरीय प्रेम में लीन होने की अवस्था

सारांश (Summary)

इस सूफ़ियाना कलाम का मूल सार यह है कि भारत की भूमि पर राजा-महाराजाओं की नहीं, बल्कि 'ख़्वाजा ग़रीब नवाज़' जैसे महान संतों की आत्मिक हुकूमत चलती है। इसमें मुंबई के प्रसिद्ध संतों जैसे हाजी अली, मख़दूम शाह और डोंगरी के हाजी रहमा का ज़िक्र करके उनके चमत्कारों और उनकी दरगाहों से मिलने वाले आध्यात्मिक सकून की प्रशंसा की गई है। अंत में मुरीद कहता है कि वह अपनी सारी व्यक्तिगत इच्छाएँ भूल चुका है और अब उसकी सच्ची ख़ुशी केवल और केवल उसके पीर की रज़ा (ख़ुशी) में ही छुपी हुई है।

लिरिक्स के मुताबिक, हिंदुस्तान (हिंद) में किसकी हुकूमत चलती है और शायर को क़ब्र में मुनकिर नकीर का ख़ौफ़ क्यों नहीं है?

Read more ↓
Was this page helpful?
शेयर:

प्रसिद्ध कलाकार/गीतकार

सभी देखें