اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
- 1 महीना पहले fiber_manual_record 117 बार देखा गया
टाइटल : कुछ करें अपने यार की बातें
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अख्तर रज़ा खान अज़हरी
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 05 Aug, 2023 10:48 AM IST
बार देखा गया : 284
Time to read: 1 min read
कुछ करें अपने यार की बातें,
कुछ दिल-ए-दाग़दार की बातें।
हम तो दिल अपना दे ही बैठे हैं,
अब ये क्या इख़्तियार की बातें।
मैं भी गुज़रा हूँ दौर-ए-उल्फ़त से,
मत सुना मुझको प्यार की बातें।
अहल-ए-दिल ही यहाँ नहीं कोई,
क्या करें हाल-ए-ज़ार की बातें।
पी के जाम-ए-मुहब्बत-ए-जानाँ,
अल्लाह-अल्लाह ख़ुमार की बातें।
मर न जाना मता-ए-दुनिया पर,
सुन के तू मालदार की बातें।
यूँ न होते असीर-ए-ज़िल्लत तुम,
सुनते गर होशियार की बातें।
हर घड़ी वज्द में रहे अख़्तर,
कीजिए उस दयार की बातें।
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह सूफ़ीयाना कलाम दिल की सच्ची तड़प और हुज़ूर ﷺ के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाता है। इसमें दुनिया की नश्वर (फ़ानी) दौलत को छोड़कर महबूब (नबी) की याद में खो जाने की सीख दी गई है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हम अपना दिल तो पहले ही अपने यार (नबी-ए-करीम ﷺ) को सौंप चुके हैं, इसलिए अब हमारा स्वयं पर कोई नियंत्रण (इख़्तियार) नहीं रह गया है। शायर कहता है कि दुनिया के अमीरों की बातें सुनकर इस मतलबी दुनिया की दौलत पर मत मरो, बल्कि बुद्धिमानों की बात मानो ताकि अपमान की क़ैद से बच सको।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| दिल-ए-दाग़दार | प्रेम के ग़म से घायल दिल |
| इख़्तियार | वश में होना / नियंत्रण या अधिकार |
| दौर-ए-उल्फ़त | प्रेम का दौर या ज़माना |
| हाल-ए-ज़ार | बुरी या दर्दनाक स्थिति |
| मता-ए-दुनिया | दुनिया का सामान या धन-दौलत |
| असीर-ए-ज़िल्लत | अपमान या रुसवाई का क़ैदी |
| वज्ड | आध्यात्मिक आनंद की स्थिति / रूहानी मस्ती |
| दयार | इलाक़ा या शहर (यहाँ इशारा मदीना शरीफ़ की तरफ़ है) |
इस कलाम में नसीहत दी गई है कि दुनियावी मोह-माया और धनवानों की खोखली बातों से दूर रहकर केवल ईश्वर और उसके रसूल की अनमोल मोहब्बत का आनंद लेना चाहिए। शायर 'अख़्तर' (ताजुश्शरिया हज़रत अख़्तर रज़ा ख़ान) अंत में कहते हैं कि यदि मनुष्य हर समय रूहानी सुकून और रूहानी मस्ती (वज्द) में रहना चाहता है, तो उसे केवल और केवल मदीना शरीफ़ के पावन दयार की बातें करनी चाहिए।
शायर 'अख़्तर' के मुताबिक हर घड़ी वज्द और सुकून में रहने के लिए किस दयार (शहर) की बातें करनी चाहिए?