search
लॉग इन

ख़ुल्द का रस्ता दिखाने आ गए हैं मुस्तफ़ा Lyrics In हिन्दी

(ख़ुल्द का रस्ता दिखाने आ गए हैं मुस्तफ़ा, सबको दोज़ख़ से बचाने आ गए हैं मुस्तफ़ा)


Written By

avatar
Shan E Nabi Team Desk
  • Editors Desk
  • Addednot available
  • visibilityबार देखा गया
  • comment टिप्पणियाँ
  • thumb_up0 likes
  • shareशेयर
...

टाइटल : ख़ुल्द का रस्ता दिखाने आ गए हैं मुस्तफ़ा

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: गुलाम नबी खुशतर शफायत बरकाती

जोड़ा गया : 10 Sep, 2025 03:21 PM IST

बार देखा गया : 224

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

ख़ुल्द का रस्ता दिखाने आ गए हैं मुस्तफ़ा,
सबको दोज़ख़ से बचाने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

अब जहाँ से कुफ़्र की तारीकियाँ छँट जाएँगी,
नूर का दरिया बहाने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

सबको दोज़ख़ से बचाने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

आसीऑन को बख़्शवाने के लिए रोज़-ए-जज़ा,
ख़ालिक़-ए-कुल को मनाने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

सबको दोज़ख़ से बचाने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

जश्न-ए-मीलादुन्नबी हम सब मनाएँ क्यों न जब,
सारी दुनिया जगमगाने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

सबको दोज़ख़ से बचाने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

आमिना के घर में देखो है फरिश्तों का हुजूम,
गा रहे हैं सब तराने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

ख़ुल्द का रास्ता दिखाने आ गए हैं मुस्तफ़ा,
सबको दोज़ख़ से बचाने आ गए हैं मुस्तफ़ा।

wand_stars
Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

keyboard_arrow_down

यह कलाम हुज़ूर मुस्तफ़ा ﷺ की आमद (आगमन) और उनकी रहमत का गुणगान करता है। इसमें बताया गया है कि नबी ﷺ का दुनिया में आना मानवता के लिए अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का मार्ग है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों में कवि कहता है कि मुस्तफ़ा ﷺ इस दुनिया में जन्नत का रास्ता दिखाने और लोगों को नरक की आग से बचाने के लिए आए हैं। उनके आने से अज्ञानता और कुफ़्र का अंधेरा मिट जाएगा और चारों ओर ईश्वरीय प्रकाश (नूर) की नदियाँ बहने लगेंगी।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
ख़ुल्दस्वर्ग / जन्नत
तारीकियाँअंधकार / अंधेरा
आसीओंगुनहगारों / पापियों
रोज़-ए-जज़ान्याय का दिन / कयामत
ख़ालिक़-ए-कुलसबका पैदा करने वाला (ईश्वर)
हुजूमभीड़ या जमावड़ा
कुफ़्रइंकार या अधर्म

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि ईद-ए-मीलादुन्नबी ﷺ का जश्न पूरी दुनिया को रोशन करने का उत्सव है। नबी ﷺ वह हस्ती हैं जो प्रलय के दिन गुनहगारों की सिफ़ारिश करके ईश्वर को मनाएंगे। उनकी पैदाइश पर न केवल इंसान बल्कि फ़रिश्ते भी खुशी के तराने गा रहे हैं।

"ख़ालिक़-ए-कुल को मनाने आ गए हैं मुस्तफ़ा"—क्या यह पंक्ति हमें उनकी शफ़ाअत (सिफ़ारिश) पर अटूट विश्वास नहीं दिलाती?

Read more ↓
Was this page helpful?
शेयर: