मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
- 1 महीना पहले fiber_manual_record 417 बार देखा गया
टाइटल : करे चारह साज़ी ज़ियारत किसी की
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 07 Aug, 2023 09:23 AM IST
बार देखा गया : 550
Time to read: 2 min read
करे चारह साज़ी ज़ियारत किसी की,
भरे ज़ख्म दिल के मलाहत किसी की
चमक कर ये कहते हैं तलअत किसी की,
कि दीदार-ए-हक है ज़ियारत किसी की
अजब प्यारी प्यारी है सूरत किसी की,
हमें क्या ख़ुदा को है उल्फ़त किसी की
अभी पार हूँ डूबने वाले बैड़े,
सहारा लगा दे जो रहमत किसी की
किसी को किसी से हुई है न होगी,
ख़ुदा को है जितनी मोहब्बत किसी की
दम-ए-हश्र आसि मज़ा ले रहा है,
शफ़ाअत किसी की है रहमत किसी की
ख़ुदा का दिया है तेरे पास सब कुछ,
तेरे होते क्या हम को हो हाजत किसी की
क़मर एक इशारे में दो टुकड़े देखा,
ज़माने पे रौशन है ताक़त किसी की
हम हैं किसी की शफ़ाअत की ख़ातिर,
हमारे ही ख़ातिर है शफ़ाअत किसी की
मुसीबतज़दों, शाद हो तुम कि उनसे,
नहीं देखी जाती मुसीबत किसी की
न पहुँचेंगे जब तक गुनाहगार उनके,
न जाएगी जन्नत में उम्मती किसी की
ख़ुदा से दुआ है कि हुंगाम-ए-रुख़्सत
ज़बान-ए-हसन पर हो मद्हत किसी की
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह बेहद सुंदर और रूहानी नात-ए-पाक हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के नूरानी हुस्न, उनके प्रति अल्लाह की असीम मोहब्बत और क़यामत के दिन उनकी शफ़ाअत (गुनाहों की माफ़ी की सिफ़ारिश) की अज़मत को बयां करती है।
इस कलाम का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ का दीदार (ज़ियारत) करना दिल के गहरे ज़ख़्मों का इलाज (चारे साज़ी) कर देता है और उनका नूरानी चेहरा इस बात की गवाही है कि उनकी ज़ियारत वास्तव में ईश्वर का दीदार है। शायर कहता है कि मुसीबत में घिरे लोगों को खुश होना चाहिए, क्योंकि हमारे आक़ा ﷺ से किसी की तकलीफ़ देखी नहीं जाती और उनकी दया (रहमत) डूबती हुई कश्ती को भी पार लगा देती है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Hindi / English Meaning) |
|---|---|
| चारे साज़ी | इलाज, उपचार या उपाय (Healing / Remedying) |
| मलाहत | हुस्न, सलोनापन या कशिश (Elegance / Grace) |
| तलअत | चेहरा, रूप या नज़ारा (Face / Appearance) |
| दीदार-ए-हक़ | ईश्वर का दर्शन (Vision of God / Divine Truth) |
| उल्फ़त | प्रेम या मोहब्बत (Love / Affection) |
| बैड़े | कश्ती, नाव या बेड़ा (Boats / Fleet) |
| दम-ए-हश्र | न्याय का दिन या क़यामत का वक़्त (Day of Judgment) |
| आसि | पापी या गुनहगार (Sinner) |
| शफ़ाअत | माफ़ी की सिफ़ारिश (Intercession) |
| हाजत | ज़रूरत या आवश्यकता (Need / Necessity) |
| क़मर | चाँद या चन्द्रमा (Moon) |
| मद्हत | प्रशंसा, तारीफ़ या नात (Praise / Eulogy) |
इस नात में बताया गया है कि पूरी कायनात में अल्लाह को सबसे ज़्यादा मोहब्बत अपने महबूब ﷺ से है और उनके रहते हुए उम्मत को किसी और के सहारे या मदद की ज़रूरत (हाज़त) नहीं है। जब तक हुज़ूर ﷺ के गुनहगार उम्मती जन्नत में दाख़िल नहीं हो जाते, तब तक किसी और नबी की उम्मत भी जन्नत में नहीं जा सकेगी। अंत में हज़रत हसन (शायर) दुआ करते हैं कि दुनिया से विदा होते समय (हुंगाम-ए-रुख़्सत) उनकी ज़बान पर सिर्फ़ और सिर्फ़ आक़ा ﷺ की तारीफ़ जारी रहे।
इस नात के मुताबिक, सरकार ﷺ के एक इशारे पर किस चीज़ के दो टुकड़े हो गए थे?