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हम को बुलाना या रसूल अल्लाह Lyrics In हिन्दी

(हम को बुलाना या रसूल अल्लाह, हम को बुलाना या रसूल अल्लाह)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : हम को बुलाना या रसूल अल्लाह

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 17 Aug, 2026 06:25 AM IST

बार देखा गया : 10

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

हम को बुलाना या रसूल अल्लाह ﷺ,
हम को बुलाना या रसूलल्लाह ﷺ,
हम को बुलाना या रसूल अल्लाह ﷺ

कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देख देखेंगे,
हमें बुलवाएँगे आका मदीना हम भी देखेंगे।
धड़क उठेगे ये दिल या धड़कना भूल जाएगा,
दिले-बिस्मिल का उस दर पर तमाशा हम भी देखेंगे।

कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देख देखेंगे,
हमें बुलवाएँगे आका मदीना हम भी देखेंगे।

अदब से हाथ बाँधे उनके रोज़े पर खड़े होंगे,
सुनहरी जालियों का यूँ नज़ारा हम भी देखेंगे।

कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देख देखेंगे,
हमें बुलवाएँगे आका मदीना हम भी देखेंगे।

दर-ए-दौलत से लौटाया नहीं जाता कोई खाली,
वहाँ ख़ैरात का बँटना ख़ुदाया हम भी देखेंगे।

कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देख देखेंगे,
हमें बुलवाएँगे आका मदीना हम भी देखेंगे।

हम को बुलाना या रसूलल्लाह ﷺ,
हम को बुलाना या रसूल अल्लाह ﷺ

बरसती गुम्बद-ए-ख़ज़रा से टकराती हुई बूँदें,
वहाँ पर शान से बारिश बरसना हम भी देखेंगे।

कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देख देखेंगे,
हमें बुलवाएँगे आका मदीना हम भी देखेंगे।

गुज़ारे रात-दिन अपने इसी उम्मीद पर हमने,
किसी दिन तो जमाल-ए-रू-ए-ज़ैबा हम भी देखेंगे।

कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देख देखेंगे,
हमें बुलवाएँगे आका मदीना हम भी देखेंगे।

दम-ए-रुख़्सत क़दम माँ भर के हैं महसूस करते हैं,
किसे है जा के लौट आने का यारा, हम भी देखेंगे।

कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देख देखेंगे,
हमें बुलवाएँगे आका मदीना हम भी देखेंगे।

पहुँच जाएँगे जिस दिन ऐ उजागर उनके क़दमों में,
किसे कहते हैं जन्नत का नज़ारा हम भी देखेंगे।

कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देख देखेंगे,
हमें बुलवाएँगे आका मदीना हम भी देखेंगे।

हम को बुलाना या रसूलल्लाह ﷺ,
हम को बुलाना या रसूल अल्लाह ﷺ

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात हज़रत मुहम्मद ﷺ से बेपनाह मोहब्बत, मदीना शरीफ जाने की तड़प और सब्ज़ गुम्बद के दीदार की हसरत का खूबसूरत बयान है, जिसमें एक आशिक की रूहानी कैफियत को दर्शाया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इस कलाम का मतलब है कि शायर और हर मोमिन के दिल में मदीने की गलियों और सब्ज़ गुम्बद की रोशनी को देखने की गहरी तमन्ना है। वहाँ के दरबार में अदब से खड़े होना और रहमतों के नज़ारे देखना हर आशिक-ए-रसूल की सबसे बड़ी आरज़ू है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
सब्ज़ गुम्बदहरा गुंबद (मस्जिद अन-नबवी का गुंबद)
दिले-बिस्मिलज़ख्मी या बेचैन दिल (Wounded/Restless heart)
सुनहरी जालियाँरोज़ा-ए-मुबारक पर लगी सुनहरी जालियाँ
गुम्बद-ए-ख़ज़रासब्ज़ गुम्बद का दूसरा नाम
जमाल-ए-रू-ए-ज़ैबानबी ﷺ का खूबसूरत और مبارک چہرہ

सारांश (Summary)

इस नात में शायर अपनी उन रातों और दिनों का ज़िक्र करता है जो सिर्फ इसी उम्मीद पर गुज़रते हैं कि एक दिन उनके आका उन्हें मदीना बुलाएंगे। वहाँ दर-ए-दौलत से कोई खाली नहीं लौटता, और वहाँ की रूहानी फज़ा तथा जन्नत जैसे नज़ारों को देखने का इंतज़ार हर मुसाफिर-ए-इश्क शिद्दत से करता है।

इस नात में शायर ने किस मक़ाम के दीदार और कौनसे गुंबद की रोशनी को देखने की तमन्ना की है?

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