मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
- 1 महीना पहले fiber_manual_record 426 बार देखा गया
टाइटल : गुनहगारो ना घबराओ यह जन्नत है मोहम्मद की
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अब्दुस सलाम कौसर लोहार्दगवी
नातख्वान/कलाकार: अब्दुस सलाम कौसर लोहार्दगवी
जोड़ा गया : 07 Sep, 2025 02:48 PM IST
बार देखा गया : 957
Time to read: 1 min read
गुनहगारो ना घबराओ,
यह जन्नत है मोहम्मद की
ख़ुदा हाकिम सही लेकिन,
हुकूमत है मोहम्मद की
मोहम्मद की... मोहम्मद की...
यह सच्चाई है इसको,
क्यों नहीं तस्लीम करते हो
ख़ुदा वालों ख़ुदाई को,
ज़रूरत है मोहम्मद की
मोहम्मद की... मोहम्मद की...
गुनहगारो ना घबराओ,
यह जन्नत है मोहम्मद की
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह कलाम हुज़ूर मोहम्मद ﷺ की शान और उनकी शफ़ाअत (सिफ़ारिश) के अटूट विश्वास को दर्शाता है। इसमें सायर गुनहगारों को ढाढस बँधाते हुए अल्लाह और उसके रसूल के गहरे संबंध को बयान करता है।
सायर कहता है कि ऐ गुनहगारों, तुम निराश न हो क्योंकि जन्नत का मालिक अल्लाह ने अपने महबूब ﷺ को बनाया है। बेशक न्याय अल्लाह के हाथ में है, लेकिन उसने इस कायनात के निज़ाम और जन्नत के अख्तियार मोहम्मद ﷺ के सुपुर्द कर दिए हैं।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| गुनहगारो | पाप करने वाले / दोषी |
| हाकिम | न्यायाधीश / न्याय करने वाला |
| हुकूमत | शासन / राज |
| तस्लीम | स्वीकार करना / मानना |
| ख़ुदाई | पूरी सृष्टि / ब्रह्मांड |
| ज़रूरत | आवश्यकता |
इस नात का सार यह है कि पूरी सृष्टि का अस्तित्व नबी ﷺ के नूर से है और खुदा की खुदाई भी उनकी मोहताज है। यह पंक्तियाँ संदेश देती हैं कि प्रलय के दिन केवल मोहम्मद ﷺ की रहमत और उनकी हुकूमत ही गुनहगारों के काम आएगी, इसलिए उनकी शरण में रहने वालों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
"ख़ुदा हाकिम सही लेकिन, हुकूमत है मोहम्मद की"—क्या यह पंक्ति ईश्वर और उनके प्रिय नबी के बीच के अटूट प्रेम और अधिकार को स्पष्ट नहीं करती?