मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Fatima Teri Chadar Ka Kya Poochna
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : ताहिर रज़ा रामपुरी
नातख्वान/कलाकार: ताहिर रज़ा रामपुरी
जोड़ा गया : 05 Oct, 2022 07:20 PM IST
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Fatima Teri Chadar Ka Kya Poochna,
Teri Chadar Ka Ehsan Islam Par,
Teri Chdar Ke Tukde Bahattar Huye,
Un Bahattar Ka Ehsan Islam Par
Fatima Teri Chadar Ka Kya Poochna,
Teri Chadar Ka Ehsan Islam Par
Fatima Tere Baba Habibe Khuda Aur Sohar Hai Maola Ali Murtaza,
Tere Bachche Saheedan E Karb O Bala,
Tere Ghar Bhar Ka Ehsan Islam Par,
Fatima Teri Chadar Ka Kya Poochna
Fatima Teri Chadar Ka Kya Poochna,
Teri Chadar Ka Ehsan Islam Par
Ran Mein Zainab Ne Haq Yun Ada Kar Diya,
Yani Tamile Hukme Khuda Kar Diya,
Apne Beto Ko Deen Pe Fida Kar Diya,
Aisi Madar Ka Ehsan Islam Par,
Fatima Teri Chadar Ka Kya Poochna
Fatima Teri Chadar Ka Kya Poochna,
Teri Chadar Ka Ehsan Islam Par,
Teri Chdar Ke Tukde Bahattar Huye,
Un Bahattar Ka Ehsan Islam Par
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यह पवित्र कलाम सैयदा फ़ातिमा ज़हरा (र.अ.) के पावन घराने की अदम्य महिमा, उनके शील-मर्यादा (चादर) और इस्लाम की रक्षा के लिए उनके पूरे परिवार द्वारा दी गई ऐतिहासिक कुर्बानियों का एक अत्यंत आदरयुक्त और भावुक वर्णन है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि इस्लाम धर्म पर हज़रत फ़ातिमा (र.अ.) के पवित्र घराने का इतना बड़ा उपकार है कि उनके आँचल की छत्रछाया में पले ७२ जाँबाज़ों ने कर्बला में अपने प्राणों की आहुति देकर सत्य को अमर कर दिया। स्वयं ईश्वर के प्रिय पैगंबर जिनके पिता हों, मौला अली पति हों और संतान कर्बला के महान शहीद हों, उस घराने का ऋण चुकाया नहीं जा सकता।
| शब्द | अर्थ (Hindi) |
|---|---|
| चादर | पर्दा / शील और पवित्रता का प्रतीक |
| हबीबे खुदा | ईश्वर के प्रिय (हज़रत मोहम्मद ﷺ) |
| शहीदान-ए-कर्ब-ओ-बला | कर्बला के मैदान के अमर शहीद |
| रण | युद्ध का मैदान / समर |
| तामीले हुकमे खुदा | ईश्वर के आदेश का अक्षरशः पालन करना |
| मादर | माता / माँ (यहाँ संदर्भ हज़रत ज़ैनब र.अ. से है) |
ख़ातून-ए-जन्नत हज़रत फ़ातिमा (र.अ.) का पूरा परिवार ही इस्लाम धर्म की नींव है। कर्बला के युद्ध में उनकी पुत्री हज़रत ज़ैनब (र.अ.) ने भी अपने बेटों को धर्म की वेदी पर न्योछावर करके ईश्वर के आदेश का पालन किया और एक ऐसी साहसी माता का उदाहरण प्रस्तुत किया जिसका उपकार इस्लाम कभी नहीं भूलेगा। कवि के अनुसार, कर्बला के ७२ शहीद वास्तव में उन्हीं के संस्कारों की देन (चादर के टुकड़े) हैं जिन्होंने अधर्म के आगे घुटने नहीं टेके।
शायर के अनुसार, मैदान-ए-कर्बला में हज़रत ज़ैनब (र.अ.) ने अपने बेटों को दीन पर फ़िदा करके किस अज़ीम हुक्म की तामीर (पालन) की थी?