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Darbar E Mustafa Ke Jo Darban Hogaye Lyrics In हिन्दी


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टाइटल : Darbar-E-Mustafa Ke Jo Darban Hogaye

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 05 Jul, 2022 11:54 AM IST

बार देखा गया : 3.4K बार डाउनलोड हुआ : 160

Time to read: 1 min read

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Darbar E Mustafa Ke Jo Darban Ho Gaye (x2)
Darbar E Mustafa Ke Jo Darban Ho Gaye (x2)
Woh Log Kaynat Ke Sultan Ho Gaye (x2)
Hashil Hame Bhi Naat Ke Guldan Ho Gaye
Hashil Mujhe Bhi Naat Ke Guldan Ho Gaye (x2)
Yani Meri Nijat Ke Saaman Ho Gaye

Jannat Khadi Hai Lene Aagos Me Unhe (x3)
Jo Bhi Rasool E Paak Pe Qurban Ho Gaye (x2)
Batil Se Kah Do Un Pe Na Dale Buri Nazar
Batil Se Kah Do Hum Pe Na Dale Buri Nazar
Ahmed Raza Hamare Nigehban Ho Gaye

Ruyee Nabi Pe Jis Ghadi Unki Nazar Padi (x3)
Aaye The Qatl Karne Musalaman Ho Gaye (x3)
Koi Kisi Ke Peeche Kisi Ka Koi Imam (x3)
Hum Muqtadiy E Hazrat E Hassan Ho Gaye (x2)
Sajjad Yeh Nigahe Nabuwat Ka Faiz Tha (x3)
Vada Kiya Jo Hind Ke Sultan Ho Gaye (x2)

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह ओजस्वी और अक़ीदत से भरपूर नात शरीफ़ बारगाह-ए-मुस्तफ़ा ﷺ की ग़ुलामी के अद्वितीय सम्मान, नात-ख़्वानी की फ़ज़ीलत और हुज़ूर ﷺ के नूरानी जमाल की तासीर का एक उत्कृष्ट वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि जो भाग्यशाली लोग हुज़ूर ﷺ के दरबार के सच्चे सेवक (दरबान) बन गए, ईश्वर ने उन्हें पूरी कायनात का बादशाह (सुल्तान) बना दिया। कवि कहता है कि जब इस्लाम के इतिहास में कुछ लोग नबी का कत्ल करने के इरादे से आए थे, तो नबी के पावन मुखमंडल (रूए नबी) पर दृष्टि पड़ते ही उनका हृदय परिवर्तित हो गया और वे मुसलमान हो गए। नात शरीफ़ पढ़ने के कारण ही मेरी आख़िरत (परलोक) में मुक्ति का साधन बन गया है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
गुलदानफूलों का पात्र (यहाँ नात की ख़ूबसूरती के संदर्भ में)
निजातमुक्ति / मोक्ष या छटकारा
आगोशबाहें / गोद
बातिलअसत्य / झूठी या अधार्मिक शक्तियाँ
मुक़्तदीअनुयायी / पीछे चलने वाला (यहाँ हज़रत हस्सान बिन साबित की नात-गोई की पैरवी करने वाला)
फ़ैज़कृपा / आध्यात्मिक आशीर्वाद

सारांश (Summary)

कवि कहता है कि जो लोग पैगंबर मुहम्मद ﷺ के प्रेम में सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं, जन्नत स्वयं बाहें फैलाकर उनका स्वागत करती है। आलाहज़रत अहमद रज़ा ख़ान की बौद्धिक और आध्यात्मिक सुरक्षा के कारण असत्य (बातिल) हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अंत में कवि कहता है कि नात-ख़्वानी में हम हज़रत हस्सान के मार्ग के अनुयायी हैं, और ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का 'हिन्द का सुल्तान' बनना भी हुज़ूर ﷺ की दिव्य दृष्टि (निगाहे नबुवत) का ही एक महान आशीर्वाद और फ़ैज़ था।

नात के अनुसार, कौन हुज़ूर ﷺ का क़त्ल करने के इरादे से आया था, लेकिन नबी के रू-ए-अनवर (चेहरे) पर नज़र पड़ते ही मुसलमान हो गया?

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