मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
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टाइटल : Choote Na Kabhi Tera Daman Ya Khwaja Moinuddin Hasan
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सैय्यद नूरानी मिया अशरफ अशरफी
नातख्वान/कलाकार: मिलाद रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 02 Jan, 2024 09:21 AM IST
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छूटे न कभी तेरा दामन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
है तुम पे फ़िदा सब तन-मन-धन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
छूटे न कभी तेरा दामन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
करते हैं फ़िदा सब तन-मन-धन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
अजमेर मुझे पहुँचा दे ख़ुदा, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की
फिर सदक़ा करूँ अपना तन-मन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
आक़ा की 'अता, हो नूर-ए-'अली, ज़हरा की कली, वलियों के वली
हसनैन के दिल, 'उस्माँ के नयन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
का'बा हो, मदीना हो या नजफ़, हर जा पे नज़र तुम आते हो
कुछ ऐसी लगी है दिल की लगन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
मय-ख़ाने में मेरी मस्ती कुछ इस तरह नज़र आए, साक़ी !
मैं रक़्स करूँ और हो छन-छन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
दरबार में मैं ऐसे आऊँ, सब हाल मेरे मस्तूर रहें
और बात करूँ मैं मन ही मन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
थक हार के मैं पहुँचा दर पे, आराम मिला जब आप मिले
और लगने लगा फिर अपनापन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
ऐ पैकर-ए-जूद-ओ-सख़ा ख़्वाजा ! अग़्यार न क्यूँ हैरान रहें
जब रहमत-ए-'आलम साया-फ़िगन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
ये मस्त-निगाही है, ख़्वाजा ! जो मस्त-ओ-मलंग बनाती है
दरबार में हो आज़ाद चलन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
अजमेर की धरती पे चलना आसान नहीं यूँ बोल उठी
ऐ नूर ! तेरे दिल की धड़कन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !
अब नूर तेरे दर पे आ के इज़हार-ए-'अक़ीदत कैसे करे
खाए है उसे बस ये उलझन, या ख़्वाजा मु'ईनुद्दीन हसन !