search
लॉग इन
Get latest updates On WhatsApp

चलो बरेली चल कर देखें जलवा आला हज़रत का Lyrics In हिन्दी

(चलो बरेली चल कर देखें जलवा आला हज़रत का, जगमग जगमग चमक रहा है रोज़ा आला हज़रत का)


Written By

avatar
Shan E Nabi Team Desk
  • Editors Desk
  • Addednot available
  • visibilityबार देखा गया
  • comment टिप्पणियाँ
  • thumb_up0 likes
  • shareशेयर
...

टाइटल : चलो बरेली चल कर देखें जलवा आला हज़रत का

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : अख्तर परवाज़ हबीबी

नातख्वान/कलाकार: अख्तर परवाज़ हबीबी

जोड़ा गया : 09 Sep, 2025 08:27 AM IST

बार देखा गया : 566

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

चलो बरेली चल कर देखें जलवा आला हज़रत का,
जगमग जगमग चमक रहा है रोज़ा आला हज़रत का।

हमको ख़ुदा तक, तुमको ख़ुदा तक, सबको ख़ुदा तक,
पहुँचा देगी निस्बत आला हज़रत की,
चलता है बाज़ार-ए-नबी में सिक्का आला हज़रत का।

जगमग जगमग चमक रहा है रोज़ा आला हज़रत का।

मेरे नबी की गुस्ताख़ी से बाज़ तो आ जा ऐ नजदी,
वरना हाथ में है हमारे डंडा आला हज़रत का।

जगमग जगमग चमक रहा है रोज़ा आला हज़रत का।

चलो बरेली चल कर देखें जलवा आला हज़रत का,
जगमग जगमग चमक रहा है रोज़ा आला हज़रत का।

wand_stars
Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

keyboard_arrow_down

यह मनक़बत इमाम अहमद रज़ा खान (आला हज़रत) की शान और उनकी धार्मिक सेवाओं के सम्मान में लिखी गई है। इसमें बरेली शरीफ स्थित उनके मज़ार की रौनक़ और उनके द्वारा सिखाए गए 'इश्क़-ए-रसूल' के मार्ग का वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

कवि कहता है कि बरेली चलो और आला हज़रत की रूहानी चमक का नज़ारा करो, जिनका दरबार नूर से जगमगा रहा है। उनकी शिक्षाओं और उनसे जुड़ाव (निस्बत) का मार्ग सीधे ईश्वर तक ले जाता है, और नबी ﷺ की बारगाह में उनके इल्म और वफ़ादारी का बोलबाला है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
जलवाभव्यता या रौनक़
रोज़ामज़ार या समाधि
निस्बतआध्यात्मिक जुड़ाव या संबंध
सिक्का चलनाप्रभाव या प्रभुत्व होना
बाज़ आनारुक जाना या दूर रहना
गुस्ताख़ीअपमान या बेअदबी

सारांश (Summary)

इस मनक़बत का सार यह है कि आला हज़रत ने अपनी लेखनी और इल्म के माध्यम से लोगों को अल्लाह और उसके रसूल ﷺ से जोड़ा है। कवि विरोधियों को चेतावनी देता है कि नबी की शान में गुस्ताख़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि आला हज़रत की दलीलें और उनका 'मसलक' सत्य की रक्षा के लिए एक मज़बूत ढाल (डंडा) की तरह है।

"चलता है बाज़ार-ए-नबी में सिक्का आला हज़रत का"—क्या यह पंक्ति आला हज़रत के इल्मी रुतबे को पूरी तरह स्पष्ट नहीं करती?

Read more ↓
Was this page helpful?
शेयर:

प्रसिद्ध कलाकार/गीतकार

सभी देखें