मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Alwida Aye Mahe Ramzan Teri Azmat Ko Salam
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: अल्ताफ हसन नूरानी बनारसी शारिक रज़ा जामी विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 20 Apr, 2023 10:20 AM IST
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Alwida Aye Mahe Ramzan Teri Azmat Ko
Tu Jo Aaya Sath Laya Aasma Se Rehmate
Tere Sadke Jo Mili Har Ek Naimat Ko Salam
Alwida Aye Mahe Ramzan Teri Azmat Ko
Is Mahine Me Mila Hai Humko Quraane Azim
Is Mahine Ke Sabhi Lamhat Rehmat Ko Salam
Alwida Aye Mahe Ramzan Teri Azmat Ko
Fath Makka Bees Ramzan Ul Mubarak Ko Mili
Fatah Makka Ke Chehro Ki Masrrat Ko Salam
Alwida Aye Mahe Ramzan Teri Azmat Ko
Roza Rakh Kar Aata Peese Hatho Me Chale Pade
Fatima Zohra Ki Pakizah Musakkat Ko Salam
Alwida Aye Mahe Ramzan Teri Azmat Ko Salam
Alwida Aye Mahe Ramzan Teri Azmat Ko Salam
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यह रमज़ान के मुक़द्दस महीने की विदाई पर लिखा गया एक बेहद ख़ूबसूरत और ऐतिहासिक संदर्भों से युक्त अलविदाई कलाम है। इसमें रमज़ान की विदाई के दुःख के साथ-साथ उसकी महानता (अज़मत) और उससे जुड़ी इस्लामी इतिहास की यादों को सलाम पेश किया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हम रमज़ान के पाक महीने को उसकी अज़मत के साथ विदा कर रहे हैं, जो अपने साथ आसमान से रहमतों की बारिश लेकर आया था। इसी महीने में मानवता को 'क़ुरान-ए-अज़ीम' जैसी महान किताब मिली, इसलिए इस महीने के एक-एक पल (लमहात) को सलाम पेश किया गया है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| माहे रमज़ान | रमज़ान का महीना |
| अज़मत | महानता / बड़प्पन / प्रतिष्ठा |
| कुरान ऐ अज़ीम | महान क़ुरान (पवित्र ग्रंथ) |
| लमहात | लम्हे / पल (Moments) |
| फ़तह मक्का | मक्का शहर की विजय (जीत) |
| मससरत | ख़ुशी / प्रसन्नता |
| मसक्कत (मुशक़्क़त) | कठिन परिश्रम / कड़ी मेहनत |
इस कलाम का मुख्य सार यह है कि रमज़ान का महीना केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि बड़े ऐतिहासिक वाक़यात का भी गवाह है, जैसे 20 रमज़ान को हुई 'फ़तह-ए-मक्का' (मक्का विजय) की ऐतिहासिक ख़ुशी। इसके साथ ही, यह कलाम पैग़ंबर साहब की लाडली बेटी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा की उस पाक मुशक़्क़त (कड़ी मेहनत) को याद करता है, जो रोज़ा रखकर अपने हाथों से चक्की पर आटा पीसती थीं, जिससे उनके हाथों में छाले पड़ जाते थे। अंत में, इस महीने से मिली हर बरकत का शुक्रिया अदा करते हुए इसे अदब से अलविदा कहा गया है।
लिरिक्स के मुताबिक, 20 रमज़ान-उल-मुबारक को कौन सी बड़ी ऐतिहासिक कामयाबी (जीत) मिली थी?