मेरे सरकार गुलज़ार-ए-मिल्लत की क्या शान है
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टाइटल : Aisa Kiya Husain Ne Sajda Namaz Mein
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी
नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी
जोड़ा गया : 14 Jul, 2024 05:12 PM IST
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Aisa Kiya Husain Ne Sajda Namaz Mein,
Jaise Jhuka Ho Sabr Ka Kaba Namaz Mein
Aisa Kiya Husain Ne Sajda Namaz Mein
Jab Tak Na Bakshe Jayenge Nana Ke Ummati,
Tab Tak Rahega Unka Nawasa Namaz Mein
Aisa Kiya Husain Ne Sajda Namaz Mein
Baalo Se Saaf Kar Ke Zameen Boli Fatima,
Aayega Kal Yehin Mera Beta Namaz Mein
Aisa Kiya Husain Ne Sajda Namaz Mein
Jo Rahe Gaya Tha Usko Adaa Kar Gaaye Husain,
Maola Ali Ka Dusraa Sajda Namaz Mein
Aisa Kiya Husain Ne Sajda Namaz Mein
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यह मनकबत कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (र.अ.) के उस ऐतिहासिक और अंतिम सजदे की महानता को दर्शाती है, जिसे उन्होंने तलवारों के साये में भी नहीं छोड़ा।
शायर कहता है कि इमाम हुसैन (र.अ.) का सजदा इतना महान था कि मानो स्वयं 'सब्र' ने अपना सिर झुका दिया हो। उन्होंने अपने नाना (पैगंबर मुहम्मद ﷺ) की उम्मत की बख्शिश के लिए सजदे में अपना सिर दे दिया और हज़रत अली (र.अ.) के उस अधूरे रहे गए सजदे को शहादत के साथ पूरा किया।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सब्र का काबा | धैर्य का प्रतीक / अटूट सब्र की मिसाल |
| बख्शे जाना | क्षमा किया जाना / गुनाहों की माफी |
| उम्मती | पैगंबर ﷺ के अनुयायी |
| नवासा | बेटी का बेटा (दोहता) |
| अदा करना | पूरा करना या निभाना |
| मौला अली | हज़रत अली (र.अ.) का सम्मानजनक नाम |
इस कलाम का सार यह है कि इमाम हुसैन (र.अ.) ने अपनी शहादत के माध्यम से नमाज़ और इबादत की अहमियत को अमर कर दिया। उनका यह सजदा केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि उम्मत की निजात (मुक्ति) के लिए दी गई एक महान कुर्बानी थी, जिसने हक और बातिल के बीच स्पष्ट रेखा खींच दी।
मनक़बत के आखिर में हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) के सजदे को मौला अली (क.व.) के किस सजदे से जोड़ा गया है, और उन्होंने इसे कैसे अदा किया?