मेरे सरकार आए
- 9 महीने पहले fiber_manual_record 719 बार देखा गया
टाइटल : आए री मोरे आंगना मोइनुद्दीन
श्रेणी (कटेगरी) : कव्वाली के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : साबरी ब्रदर्स
नातख्वान/कलाकार: साबरी ब्रदर्स
जोड़ा गया : 19 May, 2023 07:55 AM IST
बार देखा गया : 419
Time to read: 5 min read
साहब जी सुलतान जी तुम बड़े ग़रीब नवाज़,
अपनी करके राखियो सो बांह गहे की लाज
आए हुए हैं मोरे आंगना, सब वलियों के राजा,
हैं जो रसूलुल्लाह के प्यारे, सब कहें उनको ख़्वाजा
मोरे आंगना मोइनुद्दीन आए री,
मोरे आंगना मोइनुद्दीन आए री
मोरे आंगना आंगना...
मोरे आंगना आंगना...
आए री आए, मोरे भाग जगाए,
मोरे आंगना मोइनुद्दीन...
आए री आए, मोरे भाग जगाए
आए री आए, मोरे भाग जगाए
मोरे भाग जगाए...
मोरे भाग जगाए...
आओ सैयो रल देवो बधाई,
मैं वर पाया ख़्वाजा माही,
आज दा रोज़ मुबारक चढ़ेया,
ख़्वाजा साडे वेड़े वडेया
मोरे भाग जगाए...
मोरे भाग जगाए...
जागे भाग हमारे सजनी,
मोरे भाग जगाए...
मोरे भाग जगाए...
मैं सो कर लेंदा पीर मनावां,
मोरे आंगना मोइनुद्दीन आए री...
सोने का दिया रा मैं चौमुख वारूं,
अपने ख़्वाजा पे मैं तन मन वारूं
आए री आए, मोरे भाग जगाए,
मोरे आंगना मोइनुद्दीन आए री...
मन में ख़ुशी के फूल खिले हैं,
आज मोहे मोरे ख़्वाजा मिले हैं,
खुशियाँ मनाओ सखियों, झूम के गाओ
आए री आए, मोरे आंगना मोइनुद्दीन
आए री आए, मोरे आंगना मोइनुद्दीन
ख़्वाजा पिया हैं जग उजियारे,
जग उजियारे, जगत उजियारे,
आल-ए-नबी ज़हरा के दुलारे,
जान-ए अली हैं ख़्वाजा, इब्न-ए-सखी हैं
ख़्वाजा क़ुतुब हैं आज यहाँ पर,
झूम रहे हैं सारे क़लन्दर,
बाबा फ़रीद भी आए हुए हैं...
मोरे आंगना मोइनुद्दीन आए री...
आज मोरे घर धूम मची है,
ख़्वाजा पिया की शादी रची है
ख़्वाजा पिया की शादी रची है...
ख़्वाजा पिया की शादी रची है...
ख़्वाजा उस्मान मेहंदी लाए,
ख़्वाजा क़ुतुब हैं झंडा उठाए,
शैख़ फ़रीद भी वज्द में आए,
बाबा फ़रीद भी वज्द में आए,
निज़ामुद्दीन और साबिर गाएँ
ख़्वाजा पिया की शादी रची है...
ख़्वाजा पिया की शादी रची है...
ख़्वाजा पिया... मोरे ख़्वाजा पिया की,
ख़्वाजा पिया... मोरे ख़्वाजा पिया...
पिया पिया पिया पिया……
आओ सखि मिल चौसर खेलें,
ख़्वाजा अपने संग,
जीत गई तो ख़्वाजा मिलेंगे,
जीत गई तो ख़्वाजा मिलेंगे,
ख़्वाजा मिलेंगे... महाराजा मिलेंगे
जीत गई तो ख़्वाजा मिलेंगे,
हारी तो ख़्वाजा संग...
आज मोरे घर धूम मची है,
ख़्वाजा पिया की शादी रची है,
दूल्हा बने ख़्वाजा उस्मान के प्यारे
मोरे आंगना मोइनुद्दीन आए री...
धम्माल खेलें सरमस्त आकर,
(धम्माल बजता है...)
धम्माल खेलें सरमस्त आकर
मस्ती में हैं बु अली शाह क़लन्दर,
ख़ुसरो बधावा लाए री
मोरे आंगना मोइनुद्दीन,
मोरे आंगना मोइनुद्दीन
मोरे आंगना वो आए...
मोरे आंगना वो आए...
हमारे घर को ये रौनक कहाँ मयस्सर थी,
हुज़ूर आपके क़दमों की मेहरबानी है
वो आए मोरे आंगना...
वो आए मोरे आंगना...
अपने ख़्वाजा पे मैं जूबना लुटाऊँ,
अपने ख़्वाजा पे मैं वारी जाऊँ
वारी जाऊँ बलिहारी जाऊँ,
अपने ख़्वाजा पे मैं वारी जाऊँ
आया बना आया...
हरियाला बना आया
हैदर का पूत आया, ज़हरा का जाया आया,
ये दिन खुदा दिखाया, मेरा ख़्वाजा बना आया
आया बना आया...
आया बना आया...
हैदर का पूत आया, ज़हरा का जाया आया,
ये दिन खुदा दिखाया, मेरा ख़्वाजा बना आया
रे... आया बना आया...
आया बना आया...
मैं तो नज़र के दर से देखी ना आँख भर के,
मोहन मुख पाया, मेरा ख़्वाजा बना आया
देखो वक़ार कैसी मुखड़े पे है तजल्ली,
जग सारा जगमगाया, मेरा ख़्वाजा बना...
मोरे आंगना वो आए,
मोरे आंगना वो आए
मोरे आंगना मोइनुद्दीन आए री...
मोरे आंगना मोइनुद्दीन...
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह एक बेहद लोकप्रिय, पारंपरिक और बहुभाषी (अवधी, पंजाबी, उर्दू) सूफ़ियाना कलाम है। इसमें सुल्तान-उल-हिंद हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (ख़्वाजा ग़रीब नवाज़) के प्रति एक मुरीद (भक्त) की अनन्य भक्ति और उनके रूहानी उर्स (मिलाप/उत्सव) की असीम ख़ुशी को दर्शाया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि भक्त के भाग्य (भाग) जाग उठे हैं क्योंकि उसके दिल के आँगन में सभी सूफ़ियों के राजा ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती तशरीफ़ लाए हैं। आज उनके रूहानी मिलाप का उत्सव (शादी) है, जिसके कारण भक्त अपने गुरु पर अपना तन-मन सब कुछ न्योछावर (वारी) करने को तैयार है और सखियों के साथ मिलकर मंगल-गीत (बधावा) गा रहा है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| बांह गहे की लाज | जिसका हाथ पकड़ा हो उसकी मान-मर्यादा या रक्षा करना |
| वेड़े वडेया | आँगन में प्रवेश किया / घर आए |
| वज्द | रूहानी मस्ती या आध्यात्मिक परमानंद की अवस्था |
| चौसर | एक प्राचीन पासे का खेल |
| बना | दूल्हा (Groom) |
| पूत / जाया | बेटा / संतान (यहाँ हज़रत अली और बीवी फ़ातिमा के वंशज के रूप में) |
| तजल्ली | ईश्वरीय प्रकाश या नूर की चमक |
इस महान सूफ़ियाना कलाम का मुख्य सार यह है कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का दरबार रूहानी आनंद का केंद्र है, जहाँ उनके उर्स के पवित्र अवसर पर चिश्ती और क़लंदरी सिलसिले के महान बुज़ुर्ग (जैसे ख़्वाजा उस्मान हारूनी, बाबा फ़रीद, हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया, साबिर पिया, बू अली शाह क़लंदर और अमीर ख़ुसरो) रूहानी तौर पर मौजूद होकर झूम रहे हैं। भक्त इतना भावविभोर है कि वह चौसर के खेल की तरह अपना सब कुछ दांव पर लगाकर अपने 'महाराजा' को पा लेना चाहता है। अंत में, ख़्वाजा जी के नूरानी चेहरे (मोहन मुख) की तुलना एक सुंदर दूल्हे से की गई है, जिसकी दिव्य चमक (तजल्ली) से पूरा संसार जगमगा उठा है।
लिरिक्स के मुताबिक, चौसर के खेल में अगर मुरीद जीत जाए या हार जाए, तो दोनों ही सूरतों (परिस्थितियों) में उसे क्या मिलेगा?