मेरे सरकार आए
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टाइटल : जैसा है मेरा पीर कोई पीर नहीं है
श्रेणी (कटेगरी) : कव्वाली के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सलीम साबरी
नातख्वान/कलाकार: सलीम साबरी
जोड़ा गया : 29 May, 2023 06:30 AM IST
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सारी जागीर लेके बैठा है,
दिल में तस्वीर लिए बैठा है,
मुझको क्या गर्दिशें सताएंगी,
सामने मेरा पीर बैठा है।
ऐसा कोई दिलकश, कोई दिलगीर नहीं है,
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है।
पुर कैफ़ है, पुर लुत्फ़ है, सुंदर है मेरा पीर,
ये सच है मुक़द्दर का सिकंदर है मेरा पीर,
क्या पूछते हो मुझसे मेरे पीर की तारीफ़,
अल्लाह की रहमत का समंदर है मेरा पीर।
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है,
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है।
वो मह जो मेरे पीर के दामन से छानी है,
मैंने उसे पी है, मेरी तक़दीर बनी है,
बिन मांगे ही भर देता है अब वो मेरा दामन,
दिलदार है, दिलवाला है, वो दिल का धनी है।
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है,
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है।
सरकार-ए-दो आलम का वो है चाहने वाला,
अंदाज़ मेरे पीर का है सबसे निराला,
हिंदू हो, मुसलमान हो या सिख हो ईसाई,
वो सबको पिला देता है मोहब्बत का प्याला।
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है,
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है।
हर दुख से, मुसीबत से बचाता है मेरा पीर,
फूलों की हँसी देता है मुझको मेरा पीर,
वो ऐसा सख़ी, ऐसा सख़ी है,
जो मांगता हूँ, मुझको दिलाता है मेरा पीर।
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है,
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है।
धड़कन में, दिल में, जिगर में है मेरा पीर,
हर लम्हा बसा मेरी नज़र में है मेरा पीर,
मैं हरम में उसे तलाश करूँ क्यों?
मौजूद मेरे घर में है मेरा पीर।
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है,
जैसा है मेरा पीर, कोई पीर नहीं है।
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यह एक बेहद खूबसूरत और रूहानी सूफियाना कलाम है। इसमें एक मुरीद (शिष्य) अपने पीर (आध्यात्मिक गुरु) के प्रति अपनी अटूट आस्था, गहरे प्रेम और उनके उदार व्यक्तित्व की महिमा का गुणगान कर रहा है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि जिसके सामने उसका गुरु (पीर) रक्षक बनकर बैठा हो, उसे जीवन की मुश्किलें या गर्दिशें (बुरा वक्त) कभी परेशान नहीं कर सकतीं। वह पीर इतना दयालु और महान है जो बिना किसी धार्मिक भेदभाव के सबको प्रेम का पाठ पढ़ाता है और अपने मुरीद की तक़दीर बदल देता है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| गर्दिशें | मुसीबतें / बुरा वक्त या परेशानियाँ |
| दिलगीर | दिल को मोह लेने वाला / दुख बांटने वाला |
| पुर कैफ़ / पुर लुत्फ़ | आनंद से भरपूर / मरुत और सुखद |
| मह | आध्यात्मिक मदिरा / ईश्वरीय प्रेम का रस |
| सख़ी | महादानी / खुले दिल से देने वाला |
| हरम | पवित्र धार्मिक स्थान (जैसे काबा या मदीना) |
इस सूफियाना कलाम का मुख्य सार यह है कि एक सच्चा गुरु ईश्वर की कृपा का समंदर होता है जो अपने भक्तों को हर संकट से बचाता है और उन्हें जीवन में खुशियाँ (फूलों की हँसी) देता है। वह जात-पात और धर्म (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) से ऊपर उठकर मानवता को मोहब्बत का प्याला पिलाता है। मुरीद के लिए उसका पीर किसी बाहरी तीर्थ या हरम में नहीं, बल्कि उसके खुद के दिल, धड़कन और घर में ही वास करता है।
लिरिक्स के मुताबिक, पीर साहब बिना किसी भेदभाव के सभी धर्मों (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) के लोगों को कौन सा प्याला पिलाते हैं?