लहू अपना बहाया करबला में
- 6 घंटों पहले fiber_manual_record 10 बार देखा गया
टाइटल : सबसे औला वो आला हमारा नबी (ﷺ)
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : कलामे आलाहज़रत (इमाम अहमद रज़ा)
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 08 Aug, 2023 12:47 PM IST
बार देखा गया : 351
Time to read: 2 min read
सबसे औला वो आला हमारा नबी (ﷺ),
सबसे बाला वो वाला हमारा नबी (ﷺ)
अपने मौला का प्यारा हमारा नबी (ﷺ),
दोनों आलम का दूल्हा हमारा नबी (ﷺ)
बज़्म-ए-आख़िर का शम्अ-ए-फरौज़ा हुआ,
नूर-ए-अव्वल का जलवा हमारा नबी (ﷺ)
बुझ गई जिसके आगे सभी मशालें,
शम्अa वो लेकर आया हमारा नबी (ﷺ)
जिसके तलवों का धोवन है आब-ए-हयात,
हैं वो जाने मसीहा हमारा नबी (ﷺ)
ख़ल्क़ से औलिया, औलिया से रसूल,
और रसूलों से आला हमारा नबी (ﷺ)
हुस्न ख़ाता हैं जिनके नमक की क़सम,
वो मलीहे दिलारा हमारा नबी (ﷺ)
ज़िक्र सब फीके जब तक न मज़कूर हो,
नमकीन हुस्न वाला हमारा नबी (ﷺ)
जिसकी दो बूंद हैं कौसर ओ सल्सबी़ल,
हैं वो रहमत का दरिया हमारा नबी (ﷺ)
जैसे सब का ख़ुदा एक है वैसे ही,
इनका उनका तुम्हारा हमारा नबी (ﷺ)
करनो बदली रसूलों की होती रही,
चाँद बदली का निकला हमारा नबी (ﷺ)
कौन देता है, देने को मुँह चाहिए,
देने वाला है सच्चा हमारा नबी (ﷺ)
सारे अच्छों में अच्छा समझिए जिसे,
हैं उस अच्छे से अच्छा हमारा नबी (ﷺ)
क्या खबर कितने तारे खिले चुप गए,
पर न डूबे न डूबा हमारा नबी (ﷺ)
मुल्क-ए-कौनैन में अंबिया ताजदार,
ताजदारों का आका हमारा नबी (ﷺ)
ला-मकाँ तक उजाला है जिसको वो हैं,
हर मकाँ का उजाला हमारा नबी (ﷺ)
सारे उँचों में उँचा समझिए जिसे,
है उस उँचे से उँचा हमारा नबी (ﷺ)
सब चमक वालों में उजलो में चमका किए,
अंधे शीशों में चमका हमारा नबी (ﷺ)
गमज़दों को रज़ा मुश्दादीजे कि हैं,
बेकसों का सहारा हमारा नबी (ﷺ)
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी अलैहिर्रहमा की लिखी हुई विश्व प्रसिद्ध नात है, जिसमें उन्होंने हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की सर्वोच्च महानता, अद्वितीय सुंदरता और उनकी असीम रहमत का वर्णन किया है।
इस कलाम का अर्थ है कि हमारे नबी ﷺ पूरी सृष्टि में सबसे ऊँचे, महान और दोनों जहानों के दूल्हा (केंद्र बिंदु) हैं। शायर कहता है कि उनके आने से पहले के सारे चिराग (पुराने दौर) फीके पड़ गए, और वह रब की दी हुई रहमतों को पूरी दुनिया में बाँटने वाले सबसे सच्चे दाता हैं।
| शब्द (Word) | अर्थ (Hindi / English Meaning) |
|---|---|
| औला वो आला | सबसे श्रेष्ठ और महान (Most Excellent & Highest) |
| बाला वो वाला | सबसे ऊँचा और सम्मानित (Most Exalted) |
| शम्अ-ए-फरौज़ा | रौशन या चमकता हुआ चिराग (Radiant Candle) |
| आब-ए-हयात | अमरता देने वाला पवित्र पानी (Water of Life) |
| मलीहे दिलारा | सांवले सलोने और दिल को लुभाने वाले हुस्न वाले (Beautiful with grace) |
| सल्सबील | जन्नत की एक पवित्र नहर या चश्मा (A spring in Paradise) |
| ताजदार | राजा या शासक (Ruler / King) |
| ला-मकाँ | वह स्थान जो समय और सीमा से परे हो (Beyond space & time) |
| मुश्दा | ख़ुशख़बरी या शुभ समाचार (Good News) |
| बेकसों | लाचार, अनाथ और बेसहारा लोग (Helpless people) |
हुज़ूर ﷺ की ज़ात सभी नबियों और रसूलों के भी आक़ा हैं और उनका मर्तबा पूरी कायनात में सबसे बुलंद है। आला हज़रत फ़रमाते हैं कि दुनिया के तमाम पीड़ितों, दुखियारों और बेसहारा लोगों को यह ख़ुशख़बरी सुना दो कि उन सभी का सबसे बड़ा आसरा और मददगार हमारा नबी ﷺ है, जिनकी रहमत धरती से लेकर ला-मकाँ तक फैली हुई है।
इस नात के आख़िरी शेर में शायर ने ग़मज़दों को क्या ख़ुशख़बरी (मज़्दा) दी है और हुज़ूर ﷺ को किसका सहारा बताया है?