मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Pyari Maa Mujhko Teri Dua Chahiye
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अजमल अज़ीज़ी कटिहार
नातख्वान/कलाकार: अजमल अज़ीज़ी कटिहार
जोड़ा गया : 21 Feb, 2023 06:23 AM IST
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Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Meri Maa, Pyari Maa
Pyari Maa Mujhko Teri Dua Chahiye
Tere Daman Ki Thandi Hawa Chahiye
Aye Maa, Aye Maa, Meri Maa, Pyari Maa
Jis Ghadi Meri Maa Muskurane Lagi
Deen O Duniya Meri Jag Magane Lagi
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Ghar Ki Raunak Hai Tu Ghar Ki Zeenat Hai Tu
Mere Sar Ki Kasam Meri Jannat Hai Tu
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Har Ghadi Sar Pe Maa Tera Saya Rahe
Tere Kadmo Se Ghar Mein Ujala Rahe
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Meri Maa, Pyari Maa
Tu Jo Shad Hai Toh Yeh Zindagi Shad Hai
Tere Bin Zindagi Meri Barbad Hai
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Meri Maa, Pyari Maa
Ranjo Gam Mein Sada Muskurati Hai Tu
Ghar Mein Khushiyon Ke Deep Jalati Hai Tu
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Meri Maa, Pyari Maa
Aye Maa, Aye Maa, Aye Maa
Aye Maa, Aye Maa, Meri Maa, Pyari Maa
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यह माँ की ममता, उनकी निश्छल शक्ति और एक बच्चे के जीवन में उनके सर्वोच्च स्थान को समर्पित एक अत्यंत भावुक, मधुर और सुंदर कविता (नज़्म) है। इसमें एक संतान अपनी माँ के प्रति अपार प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट कर रही है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि "हे मेरी प्यारी माँ! मुझे इस जीवन में किसी और धन-दौलत की लालसा नहीं है, मुझे तो केवल तुम्हारी पवित्र दुआएँ और तुम्हारे आँचल (दामन) की सुखद ठंडी छाँव चाहिए।" शायर कहता है कि जिस पल मेरी माँ के होठों पर मुस्कुराहट आती है, उस पल मेरा लोक और परलोक (दीन-ओ-दुनिया) दोनों खुशियों से जगमगा उठते हैं।
| शब्द | हिंदी अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| दामन | आँचल / पल्लू या गोद |
| दीन-ओ-दुनिया | धर्म और संसार (परलोक और यह लोक) |
| ज़ीनत | शोभा / सुंदरता या सजावट |
| शाद | प्रसन्न / खुश या आनंदित |
| रंज-ओ-ग़म | दुःख और तकलीफें / कष्ट |
| सदा | हमेशा / सदैव |
| दीप | दीपक / दीया |
इस सुंदर रचना का मूल सार यह है कि माँ ही घर की असली रौनक और गरिमा (ज़ीनत) होती है और उनके चरणों में ही स्वर्ग (जन्नत) बसता है। माँ स्वयं हर रंज-ओ-ग़म (दुःख) को झेलकर भी अपने बच्चों के लिए हमेशा मुस्कुराती है और घर को खुशियों से रोशन रखती है। माँ की प्रसन्नता में ही बच्चे का पूरा संसार बसा है, क्योंकि उनके बिना जीवन पूरी तरह अधूरा और दिशाहीन है; इसीलिए संतान सदा अपने सिर पर माँ के साए और आशीर्वाद की कामना करती है।
लिरिक्स के मुताबिक, माँ के मुस्कुराने से बच्चे की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ता है और शायर ने माँ को घर की क्या चीज़ बताया है?