मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मुस्तफ़ा की आमद का वक़्त क्या निराला है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी
नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी
जोड़ा गया : 26 Sep, 2022 02:18 PM IST
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मुस्तफ़ा की आमद का वक़्त क्या निराला है
शब गुज़रने वाली है दिन निकलने वाला है
आसमान भी जिस दर पे सर झुकाने वाला है
मुस्तफा की चौखट का मरतबा निराला है
खाके पाए आका को मल के अपने चेहरे पर
रब को मुंह दिखाने का रास्ता निकाला है
मुस्तफ़ा की आमद का वक़्त क्या निराला है
उसको छू नहीं सकतीं ज़हमतें ज़माने की
जिसको मेरे आक़ा की रह़मतों ने पाला है
आसमां की ऊंचाई उसको पा नहीं सकती
जिसको मेरे आका के इश्क़ ने उछाला है
मुस्तफ़ा की आमद का वक़्त क्या निराला है
हज़रतों के हज़रत भी देख कर यही बोले
मेरे आला हज़रत का मरतबा निराला है
उनके पांव का धोवन चांद में सितारों में
रंग-ओ-रोगने जन्नत आपका गुसाला है
मुस्तफ़ा की आमद का वक़्त क्या निराला है
दुश्मनाने आक़ा तो जाएंगे जहन्नम में
आशिकों की क़िस्मत में जन्नती निवाला है
मुस्तफ़ा की आमद का वक़्त क्या निराला है
शब गुज़रने वाली है दिन निकलने वाला है
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यह रूहानी नात शरीफ़ हुज़ूर पाक हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के इस संसार में शुभागमन (मिलाद), उनकी सर्वोच्च महानता और उनके सच्चे प्रेमियों (आशिकाने रसूल) को मिलने वाले अद्वितीय सम्मान का बहुत ही सुंदर और आस्थापूर्ण वर्णन है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि आक़ा ﷺ के जन्म का समय अत्यंत दिव्य है, जो अज्ञानता की रात के बीतने और हकीकी रोशनी के दिन के उदय होने का प्रतीक है। उनकी चौखट का सम्मान इतना बड़ा है कि स्वयं आसमान भी वहाँ झुकता है, और भक्त अपने चेहरे पर आक़ा के चरणों की धूल (खाक-ए-पा) लगाकर ईश्वर के सम्मुख जाने का गौरवमयी मार्ग खोजते हैं।
| शब्द | अर्थ (Hindi) |
|---|---|
| आमद | आगमन / पधारना |
| शब | रात / रात्रि |
| मरतबा (मर्तबा) | पद / सम्मान या ऊँचा स्थान |
| खाके पाए (ख़ाक-ए-पा) | चरणों की धूल / चरण-रज |
| ज़हमतें | कष्ट / परेशानियाँ या मुसीबतें |
| गुसाला | पवित्र स्नान का जल / धोवन |
कवि कहता है कि जिसे आक़ा ﷺ की दया और कृपा का संरक्षण मिल जाए, उसे संसार का कोई दुख छू भी नहीं सकता। इस कलाम में 'आला हज़रत' के ऊंचे रूतबे का ज़िक्र है और बताया गया है कि आक़ा ﷺ से सच्चा प्रेम करने वालों की किस्मत में जन्नत है, जबकि उनके शत्रुओं का ठिकाना नरक (जहन्नम) है। आक़ा ﷺ के पवित्र कदमों की बरकत से ही चाँद, सितारों और पूरी जन्नत की रौनक व खूबसूरती कायम है।
शायर के अनुसार, मुस्तफा ﷺ की आमद (आगमन) का वक्त दुनिया के लिए किस तरह का बदलाव लेकर आया है?