रुख़ दिन है या महर-ए-समा ये भी नहीं वो भी नहीं
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टाइटल : Jab Se Dil Mein Basaya Hai Tumko Zindagi Khubsoorat Hui Hai
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 13 Jul, 2022 08:07 AM IST
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जब से दिल में बसाया है तुमको, (x2)
ज़िंदगी खूबसूरत हुई है
जब से दिल में बसाया है तुमको, (x2)
ज़िंदगी खूबसूरत हुई है
लग रहा है मुझको अब तो जैसे,
मुझपे कुर्बान जन्नत हुई है
थाम के दिलको परते अदब से,
उनकी आँखों को मैं कहूं लूँगा
ज़िंदगी मे मुकद्दर से जिनको,
मुस्तफा की ज़ियारत हुई है
गीत गाते हम यूं रज़ा के,
गुल लुटाते है यूं हम वफ़ा के (x2)
आलहज़रत के ज़ोरों कलम से,
सुन्नियत की हिफाज़त हुई है
जानता भी ना था कोई सज्जाद,
कोई पूछता भी ना था
नाते पाके शाहेदीन के सदके,
आज दुनिया मे शोहरत हुई है