मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : जब से दिल में बसाया है तुमको ज़िंदगी खूबसूरत हुई है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) कलाम के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 13 Jul, 2022 07:57 AM IST
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जब से दिल में बसाया है तुमको, (x2)
ज़िंदगी खूबसूरत हुई है
जब से दिल में बसाया है तुमको, (x2)
ज़िंदगी खूबसूरत हुई है
लग रहा है मुझको अब तो जैसे,
मुझपे कुर्बान जन्नत हुई है
थाम के दिलको बढ़के अदब से,
उनकी आँखों को मैं कहूं लूँगा
ज़िंदगी मे मुकद्दर से जिनको,
मुस्तफा की ज़ियारत हुई है
गीत गाते हम यूं रज़ा के,
गुल लुटाते है यूं हम वफ़ा के (x2)
आलहज़रत के ज़ोरों कलम से,
सुन्नियत की हिफाज़त हुई है
जानता भी ना था कोई सज्जाद,
कोई पूछता भी ना था
नाते पाके शाहेदीन के सदके,
आज दुनिया मे शोहरत हुई है
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यह अत्यंत भावपूर्ण और रूहानी नात शरीफ़ ईश्वर के प्रिय नबी ﷺ के प्रति अनन्य प्रेम, उनकी ज़ियारत (दर्शन) के सौभाग्य और नात-ख़्वानी की बरकत का एक सुंदर वर्णन है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब से मैंने अपने आका ﷺ के पवित्र प्रेम को दिल में बसाया है, तब से मेरी संपूर्ण ज़िंदगी बेहद ख़ूबसूरत हो गई है और ऐसा महसूस होता है मानो मुझ पर जन्नत ही न्योछावर हो गई है। कवि कहता है कि मैं बड़े अदब के साथ उन भाग्यशाली आँखों को चूम लेना चाहता हूँ, जिन्हें मुक़द्दर से जीवन में हुज़ूर मुस्तफ़ा ﷺ के दीदार (ज़ियारत) का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
| शब्द | अर्थ (Hindi) |
|---|---|
| ज़ियारत | पवित्र दर्शन / दीदार |
| ज़ोरो क़लम | लेखनी की शक्ति / लिखने की ताक़त |
| सुन्नियत | अहले सुन्नत वल जमात का मार्ग (सच्चा इस्लामी मार्ग) |
| शाहेदीन | दीन (धर्म) के बादशाह यानी हुज़ूर ﷺ |
| सदके | कृपा से / बदौलत या माध्यम से |
| शोहरत | प्रसिद्धि / नाम होना या इज़्ज़त मिलना |
कवि कहता है कि इश्क़-ए-रसूल दुनियावी जीवन को गरिमा और रूहानी सुकून से भर देता है। इस कलाम में इमाम अहमद रज़ा ख़ान (आलाहज़रत) की इल्मी ख़िदमात को ख़राज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए बताया गया है कि उनकी सशक्त लेखनी (ज़ोरो क़लम) से सच्चे दीन की हिफ़ाज़त हुई है। अंत में कवि 'सज्जाद' कृतज्ञता व्यक्त करता है कि जिसे दुनिया में कोई जानता भी नहीं था, आज उसे जो भी इज़्ज़त और प्रसिद्धि मिली है, वह केवल शहंशाह-ए-दीन ﷺ की पवित्र नात पढ़ने के सदके मिली है।
शायर के अनुसार, आलाहज़रत अहमद रज़ा ख़ान के 'ज़ोरो क़लम' (लेखनी की ताक़त) से किस चीज़ की हिफ़ाज़त हुई है?