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हर देस में गूंजेगा अब या रसूल अल्लाह Lyrics In हिन्दी

(हर देस में गूंजेगा अब या रसूल अल्लाह, हम सर पे कफ़न बांधे मैदान में निकले हैं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : हर देस में गूंजेगा अब या रसूल अल्लाह

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 05 May, 2022 03:08 PM IST

बार देखा गया : 2.3K

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

हम सर पे कफ़न बांधे मैदान में निकले हैं
बातिल के महलों को हम ढाने निकले हैं

हिम्मत है हमें टोको, दम है तो हमें रोको
हम नार ए रिसालत को फैलाने निकले हैं

हर देस में गूंजेगा अब या रसूल अल्लाह
हर शक्स पुकारेगा अब या रसूल अल्लाह

हम सारी दुनिया में हलचल सी मचा देंगे
सरकार के आशिक हैं रंग अपना जमा देंगे

मिलाद ए नबी करना ये खून में शामिल है
इस मिशन की खातिर हम दिन रात लगा देंगे

सरकार की नातों से पुर जोश है दीवाने
मिलाद की महफ़िल में महोल बना देंगे

क्यों करना मनायें हम ये सुन्नी शकाफ़त है
मिलाद मनाने पर सरकार जगा देंगे

सौदा ना करेंगे हम ईमान ना बेचेंगे
नामुस ए रिसालत पर दुनिया को हिला देंगे

हर नसल का नारा है हर क़ौम का नारा है
इस नारे से लोगों को आपस में मिला देंगे

इस्लाम जो मज़हब है पेग़म ए मोहब्बत है
इस अमन के परचम को हर घर में जगा देंगे

सरकार की इज़्ज़त पर मरना है हमें लोगों
ये वादा हमारा है सब कुछ ही लुटा देंगे

हम ने यही ठनी है मन्नत यही मानी है
इस देश की मिट्टी पर खून अपना बहा देंगे

है आल ए नबी प्यारे असहाब सितारें हैं
दोनों की मोहब्बत को हम दिल में बसा देंगे

आये  हैं उजागर संग अमजद ओ ताहिर भी
पेग़ाम ए नबी देंगे अहकाम ए ख़ुदा देंगे

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह एक अत्यंत ओजस्वी, जोश से भरपूर और दृढ़ संकल्प को दर्शाने वाली नात (या मन्क़बत) है, जिसमें पैगंबर मुहम्मद ﷺ के सम्मान (नामूस) की रक्षा, उनके प्रति अटूट निष्ठा और मिलाद-उन-नबी मनाने के सुन्नी सांस्कृतिक गौरव को रेखांकित किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ के दीवाने अपनी जान की परवाह किए बिना (सिर पर कफ़न बाँधकर) असत्य और अधर्म (बातिल) के गढ़ को नेस्तनाबूद करने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। वे पूरी दुनिया में पूरे हौसले के साथ 'नारा-ए-रिसालत' (पैगंबर की गवाही का नारा) और 'या रसूल अल्लाह' की गूँज फैलाना चाहते हैं, जिसे रोकना किसी के वश में नहीं है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
बातिलअसत्य / झूठ या अधर्म
शकाफ़त (सक़ाफ़त)संस्कृति / सभ्यता या सांस्कृतिक धरोहर
नामूस-ए-रिसालतपैग़ंबर की गरिमा / हुज़ूर ﷺ की इज़्ज़त और सम्मान
असहाबपैगंबर के साथी / सहाबा-ए-कराम
अहकामआदेश / ईश्वर के नियम या फ़र्मान

सारांश (Summary)

इस कलाम में दृढ़तापूर्वक कहा गया है कि मिलाद मनाना हमारे लहू में रचा-बसा है और नबी की इज़्ज़त की ख़ातिर आशिक़ अपना सब कुछ न्योछावर करने को तत्पर हैं। कवि इस्लाम को विशुद्ध रूप से प्रेम और शांति (अमन) का धर्म बताता है, जिसका झंडा वे हर घर में फहराना चाहते हैं। कलाम के अंतिम भाग में 'आल-ए-नबी' (नबी का घराना) और 'असहाब' (सहाबा) दोनों के प्रति एक समान निष्ठा व प्रेम रखने का संदेश देते हुए ईश्वर के आदेशों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया है।

नात के अनुसार, शायर ने इस्लाम मज़हब को किस चीज़ का पैग़ाम बताया है और वह हर घर में कौन सा परचम (झंडा) लहराने की बात कर रहा है?

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