मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : गुलशन-ए-आला-हज़रत की जो जान है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 05 Aug, 2023 06:24 PM IST
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गुलशन-ए-आला-हज़रत की जो जान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
मस्लक-ए-आला-हज़रत की पहचान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
जिस के वालिद मुफस्सिर हैं क़ुरआन के,
जिस के दादा मुहाफ़िज़ हैं ईमान के,
जिस का नाना बरेली का सुल्तान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
गुलशन-ए-आला-हज़रत की जो जान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
जिस के बाबा वली, जिस के ताया वली,
जिस के दादा वली, जिस के नाना वली,
जिस की अज़मत पे हर एक क़ुर्बान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
इल्म-ओ-तक़वा की जो प्यारी तस्वीर है,
जिस ने पाई अज़ीमत की तंवीर है,
इस्तिक़ामत की मज़बूत चट्टान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
जो उलूम-ए-रज़ा का है वारिस बना,
जिस के सर फ़ख़्र-ए-अज़हर का सेहरा सजा,
वो बरेली का अख़्तर रज़ा ख़ान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
तेज़ तलवार-सी जिस की तहरीर है,
और बिजली-सी जैसी तक़रीर है,
दुश्मन-ए-दीन जिस से परेशां है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
जिस की नज़र-ए-विलायत के हैं तज़किरे,
अब भी जारी करामत के हैं सिलसिले,
हिंद में चार-सू जिस का फ़ैज़ान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
एक सरों का समंदर बरेली में था,
मेरे मुर्शिद का जिस दम जनाज़ा उठा,
आज भी अक़्ल-ए-इन्सान हैरान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
हुस्न-ए-अख़्तर को कैसे करूँ मैं बयाँ,
जिस के चेहरे को मैं देखता रह गया,
देख कर जिस को मुस्काया ईमान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
कर रहा हूँ मैं मुर्शिद की अज़मत बयाँ,
मेरे पेश-ए-नज़र इन का है आस्ताँ,
मेरे अख़्तर रज़ा का ये फ़ैज़ान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
कुफ़्र की आँधियों से भी टकरा गया,
रब ने बख़्शा था ऐसा इसे हौसला,
आसिम-उल-क़ादरी जिस पे क़ुर्बान है,
मेरे ताजुश्शरिया की क्या शान है।
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यह मनकबत मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान बरेलवी (ताजुश्शरिया) के महान व्यक्तित्व, उनके पवित्र वंश (आला हज़रत ख़ानदान) और उनके धार्मिक ज्ञान की प्रशंसा में लिखी गई है। इसमें उन्हें 'मस्लक-ए-आला हज़रत' का सच्चा रक्षक और प्रतीक बताया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि ताजुश्शरिया एक ऐसे प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसके नाना स्वयं आला हज़रत (बरेली के सुल्तान) हैं और जिनके पूर्वज बड़े वली (संत) रहे हैं। शायर कहता है कि उनकी लेखनी तलवार की तरह तेज़ और उनके भाषण बिजली की तरह प्रभावशाली थे, जिसने धर्म के विरोधियों को झुका दिया और पूरे भारत में उनके ज्ञान की रोशनी फैलाई।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| ताजुश्शरिया | शरिया का ताज (मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान की उपाधि) |
| मस्लक | विचारधारा / धार्मिक मार्ग |
| मुफस्सिर | क़ुरआन की व्याख्या (तफ़सीर) करने वाला |
| मुहाफ़िज़ | रक्षक / हिफ़ाज़त करने वाला |
| तक़वा | परहेज़गारी / ईश्वर का भय |
| तंवीर | प्रकाश / नूर / रौशनी |
| इस्तिक़ामत | दृढ़ता / अडिग रहना |
| फ़ख़्र-ए-अज़हर | अल-अज़हर विश्वविद्यालय (मिस्र) का गौरव |
| चार-सू | चारों दिशाओं में / हर तरफ़ |
इस कलाम में बताया गया है कि हुज़ूर ताजुश्शरिया ज्ञान, आत्म-नियंत्रण और साहस की एक ऐसी मिसाल थे जो अधर्म की आँधियों के सामने भी चट्टान की तरह डटे रहे। शायर 'आसिम-उल-क़ादरी' कहते हैं कि बरेली शरीफ़ में उठा उनका जनाज़ा इस बात का गवाह था जहाँ इंसानी सरों का समंदर उमड़ पड़ा था, और उनका नूरानी चेहरा देखकर ऐसा लगता था मानो स्वयं 'ईमान' मुस्कुरा रहा हो।
लिरिक्स के मुताबिक ताजुश शरिया के नाना कौन हैं और उनकी तक़रीर को किसके मानिंद (तरह) बताया गया है?