रुख़ दिन है या महर-ए-समा ये भी नहीं वो भी नहीं
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टाइटल : Aap Agar Bula Lenge Ya Nabi Madine Mein
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी
नातख्वान/कलाकार: ज़ैनुल आबिदीन कानपुरी
जोड़ा गया : 05 Oct, 2022 05:48 PM IST
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आप अगर बुला लेंगे या नबी मदीने में
उम्र भर करूंगा मैं नौकरी मदीने में
मुस्तफा के गुंबद का हुशन ही कुछ ऐसा है
जिब्राईल आते हैं आज भी मदीने में
अपने घर की चौखट को फिर ना मूड के देखूँगा
मुस्तफा आता करदे झोपड़ी मदीने में
काश मुझसे हो जाये भूल से खाता कोई
इस गरज़ से लग जाये हथकड़ी मदीने में
आप अगर बुला लेंगे या नबी मदीने में
उम्र भर करूंगा मैं नौकरी मदीने में