व्याख्या (Explanation)
इंसान से भूल-चूक होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। अगर आप खाना शुरू करते समय 'बिस्मिल्लाह' कहना भूल गए हैं और खाने के दौरान आपको याद आता है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। इस्लाम में इसका भी समाधान मौजूद है। यह दुआ (बिस्मिल्लाही अव्वलहु व आखिरहु) पढ़कर आप खाने की शुरुआत और अंत में अल्लाह का नाम शामिल कर लेते हैं, जिससे खाने में बरकत वापस आ जाती है। यह अल्लाह की रहमत और उसकी असीमित कृपा का प्रमाण है कि वह अपने बंदों की भूल को सुधारने का भी मौका देता है।
क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?
यह दुआ हदीस-ए-मुबारक से साबित है। हज़रत आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
"जब तुम में से कोई खाना खाए तो अल्लाह का नाम ले। अगर वह शुरू में अल्लाह का नाम लेना भूल जाए, तो उसे चाहिए कि कहे: 'बिस्मिल्लाही अव्वलहु व आखिरहु' (अल्लाह के नाम से, इसके शुरू में और इसके आखिर में)।" (सुनन तिरमिज़ी, हदीस 1858)
सारांश (Summary)
खाना खाते वक्त अगर हम 'बिस्मिल्लाह' कहना भूल जाएं, तो यह दुआ उस भूल को सुधारने और खाने में बरकत वापस लाने का जरिया है। इसे पढ़ने से हम खाने के दौरान भी अल्लाह को याद रखने का अहसास बनाए रखते हैं। यह सुन्नत पर अमल करने का एक आसान तरीका है जो हमारी छोटी सी गलती को इबादत में बदल देता है। यह दुआ हमें सिखाती है कि अल्लाह हर हाल में अपने बंदों की गलतियों को माफ करने वाला और उन पर रहम करने वाला है।
अगर हम खाना खत्म करने के बाद याद करें कि बिस्मिल्लाह नहीं कही, तो क्या तब भी यह दुआ पढ़नी चाहिए?