मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Yeh Na Poocho Kidhar Ja Rahi Hun Aaj
श्रेणी (कटेगरी) : मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी
नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी
जोड़ा गया : 12 Oct, 2022 01:34 PM IST
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Yeh Na Poocho Kidhar Ja Rahi Hun
Aaj Main Apne Ghar Ja Rahi Hun
Mere Bachchon Na Aansoo Bahana,
Kabr Hi Toh Hai Asli Thikana
Yeh Na Samjho Ke Mar Ja Rahi Hun,
Aaj Main Apne Ghar Ja Rahi Hun
Samne Rooye Sarkar Hoga,
Kabr Mein Unka Deedar Hoga
Bas Yehi Soch Kar Ja Rahi Hun,
Aaj Main Apne Ghar Ja Rahi Hun
Sath Mere Nahi Sona Chandi,
Hath Mere Hai Dono Khali
Chod Kar Mal O Zar Ja Rahi Hun,
Aaj Main Apne Ghar Ja Rahi Hun
Dafan Karke Mujhe Na Bhoolana,
Kabr Par Tum Meri Aana Jana
Sunlo Lakte Jigar Ja Rahi Hun,
Aaj Main Apne Ghar Ja Rahi Hun
Sirf Do Gaz Ka Joda Pahen Kar,
Shan Se Char Kandho Par Ho Kar
Dekho Karke Safar Ja Rahi Hun,
Aaj Main Apne Ghar Ja Rahi Hun
Yeh Na Poocho Kidhar Ja Rahi Hun
Aaj Main Apne Ghar Ja Rahi Hun
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यह जीवन की नश्वरता, मृत्यु की शाश्वत सच्चाई और परलोक (आख़िरत) के सफर का एक अत्यंत भावुक और सीख देने वाला वर्णन है, जिसमें एक माँ अपने बच्चों को ढांढस बंधाते हुए मृत्यु को जीवन का अंत नहीं, बल्कि अपने असली घर लौटने की यात्रा बताती है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि इस संसार से विदा लेते समय इंसान को दुखी नहीं होना चाहिए, क्योंकि कब्र ही हर जीव का अंतिम और वास्तविक ठिकाना है। एक सच्चे श्रद्धालु (मोमिन) के लिए मृत्यु का भय इसलिए समाप्त हो जाता है क्योंकि उसे विश्वास होता है कि कब्र के अंधेरे में उसे अपने प्यारे नबी (सरकार ﷺ) का दीदार (दर्शन) नसीब होगा।
| शब्द | अर्थ (Hindi) |
|---|---|
| ठिकाना | रहने का स्थान / गंतव्य |
| रूये सरकार | पैगंबर साहब ﷺ का पवित्र मुखारविंद (चेहरा) |
| दीदार | दर्शन / देखना |
| माल ओ ज़र | धन-दौलत और सोना-चांदी |
| लक्ते जिगर | जिगर का टुकड़ा (संतान/बच्चे) |
| दो गज का जोड़ा | कफ़न का कपड़ा |
| चार कंधों पर | अर्थी या जनाज़े पर सवार होकर |
मनुष्य इस नश्वर संसार में खाली हाथ आता है और अपनी सारी जमा-पूंजी तथा धन-दौलत यहीं छोड़कर खाली हाथ चला जाता है, जहाँ उसका आखिरी पहनावा सिर्फ दो गज का कफ़न होता है। इस कलाम के ज़रिए माँ अपने बच्चों से कहती है कि वे उसकी विदाई पर आँसू न बहाएँ और दफ़न करने के बाद भी उसकी कब्र पर आते-जाते रहें, क्योंकि वह इस सांसारिक मोह को छोड़कर अपने वास्तविक स्वामी के पास जा रही है।
शायर के अनुसार, कब्र में जाने पर उन्हें किस महान शख्सियत का 'दीदार' (दर्शन) नसीब होगा, जिसकी वजह से वह खुशी-खुशी इस सफर पर जा रही हैं?