Mustafa Ka Pyara Hai Fatima Ka Shehzada
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Title : Pukaro Ya Rasool Allah
Category : Naat Lyrics
Writer/Lyricist : Various/Unknown
Naatkhwan/Artist : Ghulam Mustafa Qadri Owais Raza Qadri
Added On : 16 Sep, 2023 02:48 PM IST
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या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
तुम भी कर के उन का चर्चा
अपने दिल चमकाओ
ऊँचे में ऊँचा नबी का झंडा
आला से आला नबी का झंडा
अज़मत वाला नबी का झंडा
घर घर में लहराओ
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
या रसूलल्लाह के नारे से हम को प्यार है
हम ने ये नारा लगाया, अपना बेड़ा पार है
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
सोहणे की आमद ! मरहबा !
मक्की की आमद ! मरहबा !
मदनी की आमद ! मरहबा !
प्यारे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
अच्छे की आमद ! मरहबा !
सच्चे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
सब मिल कर बोलो ! मरहबा !
सब झूम के बोलो ! मरहबा !
या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
ख़ुल्द में होगा हमारा दाख़िला इस शान से
या रसूलल्लाह का नारा लगाते जाएँगे
या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
रब्बी हब ली उम्मती कहते हुए पैदा हुए
हक़ ने फ़रमाया कि बख़्शा, अस्सलातु व-स्सलाम
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
मनठार की आमद ! मरहबा !
सोहणे की आमद ! मरहबा !
मक्की की आमद ! मरहबा !
मदनी की आमद ! मरहबा !
प्यारे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
अच्छे की आमद ! मरहबा !
सच्चे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
सब मिल कर बोलो ! मरहबा !
सब झूम के बोलो ! मरहबा !
या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
चाँद सा चमकाते चेहरा, नूर बरसाते हुए
आ गए बदरुद्दुजा, अहलं-व्व-सहलन मरहबा
आमिना के घर में आक़ा की विलादत हो गई
मरहबा सद मरहबा, अहलं-व्व-सहलन मरहबा
बैत-ए-अक़्सा, बाम-ए-काबा, बर-मकान-ए-आमिना
नस्ब परचम हो गया, अहलं-व्व-सहलन मरहबा
पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पर्दा उठा है किस का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
जल्वा है हक़ का जल्वा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
साया ख़ुदा का साया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
फ़स्ल-ए-बहार आई, शक्ल-ए-निगार आई
गुलज़ार है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
फूलों से बाग़ महके, शाख़ों पे मुर्ग़ चहके
अहद-ए-बहार आया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
दिल जगमगा रहे हैं, क़िस्मत चमक उठी है
फैला नया उजाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
आई नई हुकूमत, सिक्का नया चलेगा
आलम ने रंग बदला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
रूह-उल-अमीं ने गाड़ा का'बे की छत पे झंडा
ता-अर्श उड़ा फरेरा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पढ़ते हैं अर्श वाले, सुनते हैं फ़र्श वाले
सुल्तान-ए-नौ का ख़ुत्बा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
दिन फिर गए हमारे, सोते नसीब जागे
ख़ुर्शीद ही वो चमका सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
प्यारे रबी-उल-अव्वल ! तेरी झलक के सदक़े
चमका दिया नसीबा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
नौशा बनाओ उन को, दूल्हा बनाओ उन को
है अर्श तक ये शोहरा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
शादी रची हुई है, बजते हैं शादियाने
दूल्हा बना वो दूल्हा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
अर्श-ए-अज़ीम झूमे, काबा ज़मीन चूमे
आता है अर्श वाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
आमद का शोर सुन कर, घर आए हैं भिकारी
घेरे खड़े हैं रस्ता सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
आओ फ़क़ीरो ! आओ, मुँह माँगी आस पाओ
बाब-ए-करीम है वा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
सूखी ज़बानों ! आओ, ऐ जलती जानो ! आओ
लहरा रहा है दरिया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
तेरी चमक दमक से आलम चमक रहा है
मेरे भी बख़्त चमका सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
बाँटा है दो-जहाँ में तू ने ज़िया का बाड़ा
दे दे हसन का हिस्सा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
ईद-ए-मीलादुन्नबी है, दिल बड़ा मसरूर है
हर तरफ़ है शादमानी, रंज-ओ-ग़म काफ़ूर है
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
इस तरफ़ जो नूर है तो उस तरफ़ भी नूर है
ज़र्रा ज़र्रा सब जहाँ का नूर से मा'मूर है
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
ग़म के बादल छट गए और ग़म के मारे झूम उठे
आ गया ख़ुशियाँ लिए माह-ए-रबीउन्नूर है
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
आमिना ! तुझ को मुबारक शाह का मीलाद हो
तेरा आँगन नूर, तेरा घर का घर सब नूर है
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
जश्न-ए-मीलादुन्नबी है, क्यूँ न झूमें आज हम
मुस्कुराती हैं बहारें, सब फ़ज़ा पुर-नूर है
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
सोहणे की आमद ! मरहबा !
मक्की की आमद ! मरहबा !
मदनी की आमद ! मरहबा !
प्यारे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
अच्छे की आमद ! मरहबा !
सच्चे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
सब मिल कर बोलो ! मरहबा !
सब झूम के बोलो ! मरहबा !
या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
सुब्ह तयबा में हुई, बटता है बाड़ा नूर का
सदक़ा ले ने नूर का, आया है तारा नूर का
मैं गदा तू बादशाह, भर दे पियाला नूर का
नूर दिन दूना तेरा, दे डाल सदक़ा नूर का
या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
तेरी नस्ल-ए-पाक में है बच्चा बच्चा नूर का
तू है ऐन-ए-नूर, तेरा सब घराना नूर का
नारियों का दौर था, दिल जल रहा था नूर का
तुम को देखा हो गया ठंडा कलेजा नूर का
या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
ताज वाले ! देख कर तेरा अमामा नूर का
सर झुकाते हैं इलाही बोल-बाला नूर का
ऐ रज़ा ! ये अहमद-ए-नूरी का फ़ैज़-ए-नूर है
हो गई मेरी ग़ज़ल बढ़ कर क़सीदा नूर का
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
सोहणे की आमद ! मरहबा !
मक्की की आमद ! मरहबा !
मदनी की आमद ! मरहबा !
प्यारे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
अच्छे की आमद ! मरहबा !
सच्चे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
सब मिल कर बोलो ! मरहबा !
सब झूम के बोलो ! मरहबा !
या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
पुकारो, या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !
या हबीब-ए-किब्रिया ! अहलं-व्व-सहलन मरहबा
मुस्तफ़ा-ओ-मुज्तबा ! अहलं-व्व-सहलन मरहबा
पेशवा-ए-अंबिया ! अहलं-व्व-सहलन मरहबा
मुरसलीं के मुक़्तदा ! अहलं-व्व-सहलन मरहबा
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
सोहणे की आमद ! मरहबा !
मक्की की आमद ! मरहबा !
मदनी की आमद ! मरहबा !
प्यारे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
अच्छे की आमद ! मरहबा !
सच्चे की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
सब मिल कर बोलो ! मरहबा !
सब झूम के बोलो ! मरहबा !